यूटी प्रशासन का फोकस ई-बसों के साथ-साथ ई-टू व्हीलर और थ्री व्हीलर पर भी है। परिवहन विभाग के पूर्व निदेशक उमाशंकर गुप्ता ने भी कुछ महीने पहले शहर में ई-ऑटो को हरी झंडी दिखाई थी। उन्होंने कहा था कि ई-ऑटो ही भविष्य है। इसी तरह देश के अन्य राज्य भी अब एलपीजी और सीएनजी ऑटो के बजाय सिर्फ ई-रिक्शा और ई-ऑटो को ही परमिट दे रहे हैं। हालांकि ऑटो चालकों का मानना है कि ई-रिक्शा और ई-ऑटो को प्रोत्साहित करने के साथ प्रशासन को शहर में चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग की व्यवस्था भी करनी होगी अन्यथा उनका कारोबार बुरी तरह प्रभावित होगा।
पंजाब और हरियाणा से आने वाले ऑटो चालकों की जुटाई जा रही जानकारी
एसटीए की ओर से पंजाब के मोहाली में पंजीकृत 500 ऑटो के प्रति हस्ताक्षर पहले ही किए जा चुके हैं और अब एसटीए कार्यालय ने पंचकूला के 500 ऑटो के प्रति हस्ताक्षर की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके माध्यम से विभाग द्वारा ऑटो चालकों की जानकारी जुटाई जा रही है। ट्रैफिक पुलिस की ओर से समय-समय पर कार्यशाला भी आयोजित किए जा रहे हैं।
बता दें कि शहर में डीजल- ऑटो पर कई साल पहले ही पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। पंजाब और हरियाणा से आने वाले डीजल ऑटो का भी चंडीगढ़ में चालान किया जाता है। हालांकि अभी भी लोगों की शिकायत रहती है कि रात के समय में अभी भी डीजल ऑटो चलाए जाते हैं। गौरतलब है कि वर्तमान में, शहर में चलने वाले ऑटो की संख्या 6000 सीमित की गई है और लगभग इतने ही परमिट जारी भी किए गए हैं।