पंचायत चुनाव में केवल उम्मीदवार को ही अलग-अलग विभागों का नो ड्यूज सर्टिफिकेट (अदेय प्रमाणपत्र) देना होगा। परिवार के सदस्यों की एनओसी की जरूरत नहीं है। नामांकन के समय उम्मीदवारों को पुलिस सत्यापन प्रमाण पत्र और निवासी प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है। इसके लिए उम्मीदवार खुद से सत्यापित एक शपथ-पत्र (एफिडेविट) देना होगा। इसमें अपने से संबंधित सभी पुलिस केस की जानकारी उस शपथ पत्र में देनी होगी। इसी के आधार पर नामांकन भरा जा सकता है।
इस संबंध में रविवार को राज्य चुनाव आयुक्त धनपत सिंह ने सभी डीसी को निर्देश जारी किया है। इससे पहले, बिना जानकारी के लोग पुलिस वेरिफिकेशन और रिहायसी प्रमाण पत्र को लेकर चक्कर लगा रहे थे। धनपत सिंह ने कहा कि पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य के उम्मीदवार का नाम संबंधित पंचायत, पंचायत समिति व जिला परिषद की मतदाता सूची में दर्ज होना जरूरी है। इसी आधार पर वह नामांकन कर सकता है।
पंच, सरपंच पद के उम्मीदवार खुद शपथ पत्र दे सकते हैं, जबकि ब्लॉक समिति और जिला परिषद के सदस्यों को नोटरी के हस्ताक्षर कराने होंगे। साथ ही पंच सरपंच पद के उम्मीदवार के घर पर चालू हालत में शौचालय होना जरूरी है। धनपत सिंह ने कहा कि अगर व्यक्ति प्राइमरी एग्रीकल्चर को-आपरेटिव सोसायटी (पैक्स), जिला केंद्रीय को-आपरेटिव बैंक और लैंड मोर्टगेज बैंक का डिफाल्टर नहीं है तो चुनाव लड़ सकता है।
इससे पहले संशय बना हुआ था कि अगर परिवार के किसी सदस्य पर सहकारी बैंक, बिजली विभाग, कृषि लोन की देनदारी है तो उस परिवार का अन्य सदस्य क्या चुनाव लड़ सकता है या नहीं। इस संशय के चलते बैंक और बिजली निगम उम्मीदवार के परिवार के पिता, दादा और पड़दादा तक पर बकाया राशि को भरने पर ही एनओसी दे रहे थे। भिवानी की एक महिला ने आयोग को शिकायत दी थी कि वह चुनाव लड़ना चाह रही है लेकिन ससुर पर बिजली बिल बकाया होने पर विभाग उसे एनओसी नहीं दे रहा है। इसके बाद आयोग ने इस मामले में संज्ञान लिया है।