चंडीगढ़। केंद्र सरकार ने रसोई गैस सिलिंडर के दाम को 200 रुपये घटा दिया है, लेकिन ये लाभ सिर्फ उन्हीं परिवारों को मिलेगा जिन्होंने उज्ज्वला योजना के तहत कनेक्शन लिया है। चंडीगढ़ में उज्ज्वला के सिर्फ 92 कनेक्शन हैं इसलिए केंद्र की इस राहत का शहर के लोगों को कुछ खास लाभ नहीं मिलने वाला है।
केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार 25 अप्रैल 2022 तक चंडीगढ़ में 92 लोगों को कनेक्शन मिला है। यह संख्या पूरे देश में सबसे कम है। शहरवासियों को एलपीजी सिलिंडर अभी भी 1000-1015 रुपये के बीच खरीदना पड़ेगा। ये संख्या कितनी कम है कि इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 13,406 परिवारों को इस योजना का लाभ मिला है। अन्य छोटे राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों में भी ये संख्या हजारों में है। चुनाव में लगभग सभी राष्ट्रीय नेताओं ने उज्ज्वलायोजना का जिक्र किया। चंडीगढ़ में हुई जनसभाओं व रैलियों में भी बार-बार उज्ज्वला योजना का जिक्र आया लेकिन सच्चाई दावों से कोसों दूर है। प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि चंडीगढ़ में लोगों के पास पहले से गैस कनेक्शन मौजूद हैं, इसलिए इस योजना के लाभार्थी कम हैं लेकिन इन दावों को नीति आयोग की हाल ही में जारी हुई फर्स्ट मल्टीडाइमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स (एमपीआई) खारिज करती है। इसमें कहा गया है कि चंडीगढ़ की करीब छह प्रतिशत जनसंख्या बेहद गरीब की श्रेणी में आती है।
चंडीगढ़ में डीबीटी के साढ़े 62 हजार लाभार्थी
शहर में करीब साढ़े 62 हजार परिवार हैं, जो गरीबी रेखा से नीचे आते हैं। प्रशासन उन्हें डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए हर महीने राशन खरीदने के लिए राशि जारी करती है। प्रायोरिटी हाउसहोल्ड के लिए 128.64 रुपये प्रति मेंबर महीने व अंत्योदय अन्न योजना के लिए 900.48 रुपये प्रति परिवार महीने के जारी किए जाते हैं। केंद्र सरकार की ओर से गेहूं और चावल के समय-समय पर रिवाइज किए जाने वाले रेट के हिसाब पर ही ये राशि तय की जाती है। इसके अलावा वर्ष 2020 में कोरोना के चलते प्रशासन ने पांच माह के लिए 25 किलो गेहूं प्रति व्यक्ति और 5 किलो किलो दाल हर परिवार को पांच माह के लिए दी थी। इसके बाद से अब तक हर परिवार को मुफ्त गेहूं भी दिया जा रहा है।
उज्ज्वला योजना को लेकर उठ रहे थे सवाल
सरकार जून 2000 से ही गैस सिलिंडर पर कोई सब्सिडी नहीं दे रही है। इसकी वजह से उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को भी बाजार कीमत पर ही रसोई गैस सिलिंडर खरीदना पड़ रहा था, लेकिन एक सिलिंडर की कीमत 1,000 रुपये के पार पहुंचने के बाद आम आदमी के लिए इसे खरीद पाना मुश्किल हो गया था। विपक्ष की तरफ से लगातार उज्ज्वला योजना पर सवाल उठाए जा रहे थे कि जिन गरीबों को ये कनेक्शन मिले हैं, वो 1000 रुपये में सिलिंडर कैसे भरवाएंगे। इसलिए सरकार ने योजना के तहत मिले सिलिंडर के दाम घटाने का फैसला लिया।