अभिनेत्री परिणीता चोपड़ा बनी थी योजना की ब्रांड एंबेसडर, अब दोनों ही बनी रहेगी
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ओलंपिक में पदक जीतने वाली साक्षी मलिक के शुरुआती दिन अच्छे नहीं रहे। अखाड़े में पहली बार उतरी तो सबकुछ सही नहीं था। साक्षी ने कहा कि वह जब पहली बार अखाड़े में उतरी थी तो लोगों ने तरह-तरह की बात करनी शुरू कर दी। उसके अखाड़े में उतरने का विरोध भी हुआ, लेकिन उसको मां सुदेश औ पिता सुखबीर का पूरा साथ मिला।
यही कारण है कि आज वह ओलंपिक में मेडल जीतकर लाई है। उसे शुरुआत में बाहर खेलने जाना होता था तब भी परिवार वाले हिचकते नहीं थे। वह छोटी थी तब उसे कई बार अपने काम छोड़कर भी साथ लेकर गए और कुश्ती खिलवाने के बाद साथ लेकर आए। साक्षी ने हर किसी से कहा कि वह किसी भी तरह बेटियों के अरमानों को न मारे और उनको आगे बढ़ने में पूरी मदद करे।
प्रदेश में बेटियों को लेकर अभी तक पूरी तरह से लोगों का नजरिया नहीं बदला है। बेटियों को गर्भ में मारने से लेकर उनको शिक्षित नहीं करने के मामले आज भी सामने आते हैं।
बेटियों के प्रति लोगों का नजरिया बदलेंगी साक्षी
अढ़ाई करोड़ का चेक भी सीएम ने साक्षी मलिक को सौंपा।
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ओलंपिक में पदक जीतने वाली साक्षी मलिक लोगों में बेटियों को लेकर नजरिया बदलने का बड़ा सहारा बनेगी। साक्षी के अभी तक के कामयाबी भरे सफर को लोगों के सामने रखा जाएगा और उनसे अपनी बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए कहा जाएगा।
साक्षी खुद बेटियों के प्रति लोगों का नजरिया बदले मैदान में उतरेगी। सम्मान समारोह या अन्य कार्यक्रम में वह लोगों से बेटियों को बढ़ावा देने की अपील करती नजर आएंगी। खुद साक्षी ने ऐसा करने की बात कही है, जिससे प्रदेश की बेटियां काफी आगे आएं।
हालांकि सरकार की बेटी बढ़ाओ, बेटी पढ़ाओ योजना के बाद हालात बदलते दिख रहे हैं। इसके बावजूद स्थिति पूरी तरह से नहीं बदली है और लिंगानुपात अच्छी तरह नहीं सुधर सका है।
इसका सबसे बड़ा कारण लोगों की बेटियों के प्रति गलत नजरिये को माना जाता है और इस नजरिये को बदलने के लिए ही साक्षी सहारा बनेगी। साक्षी ने लोगों से अपील की है कि बेटियां किसी भी तरह से बेटों से कम नहीं होती हैं। वह बेटों से ज्यादा नाम रोशन कर सकती हैं, लेकिन उसके लिए परिवार का साथ मिलना सबसे जरूरी है।
बेटी ने दिलाया है बड़ा गौरव
साक्षी मलिक के पिता सुखबीर मलिक छोड़ेंगे नौकरी
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यह एक सपने की तरह लगता है कि लोगों की भारी भीड़ रहती है और हर ओर साक्षी-साक्षी होती रहती है। हम बड़ा गौरव महसूस करते हैं कि हमारी बेटी ने ओलंपिक में मेडल जीतकर देश का मान बढ़ाया है। बेटी ने केवल अपने या हमारे लिए मेडल नहीं जीता है और न यह किसी एक का मेडल है, बल्कि यह सभी देशवासियों का मेडल है।
- सुखबीर, साक्षी के पिता
मैं बहुत खुश हूं कि साक्षी ने मेरा सपना पूरा कर दिया। साक्षी को ओलंपिक में मेडल जीतता हुआ ही देखना चाहती हूं, उसने मुझे यह मौका दिया। साक्षी के कारण आज पूरे देश में जश्न मनाया जा रहा है, जिससे हम खुद भी काफी गौरव महसूस कर रहे हैं। हर कोई यही कहता है कि ये साक्षी के मम्मी-पापा हैं तो यह सुनकर बहुत अच्छा लगता है।
- सुदेश, साक्षी की मां