एक दूसरे से सटे स्ट्रेचर। दर्द से कराहते मरीज। परेशान होते तीमारदार। वार्ड तो छोड़िए गैलरी तक में खड़े होने की जगह नहीं। डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ जैसे तैसे निकल पा रहे हैं। यह हाल चंडीगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल सेक्टर 32 की इमरजेंसी का है। मरीजों की संख्या के आगे सारे इंतजाम फेल साबित हो रहे हैं। विशेषज्ञों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी मरीजों का दर्द और बढ़ा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि दूसरे अस्पतालों से रेफर होकर आ रहे मरीजों के कारण ऐसी स्थिति आई है।
ट्राइसिटी में डेंगू के मरीजों की संख्या बेतहाशा बढ़ती जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के लिए इस पर नियंत्रण पाना बड़ी चुनौती बनी हुई है। आलम यह है कि बेड खाली नहीं हैं और स्ट्रेचर पर मरीज भर्ती होकर इलाज करा रहे हैं। मरीजों के साथ तीमारदार भी परेशान हैं। मंगलवार को कुछ मरीजों को सेक्टर 48 के अस्पताल में शिफ्ट करने की बात चली तो उन्होंने साफ मना कर दिया। कहा कि स्ट्रेचर पर इलाज मंजूर है लेकिन यहां से नहीं जाएंगे।
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सेक्टर 48 में महज 13 मरीज
सेक्टर 48 के 100 बेड के अस्पताल में महज 13 मरीज भर्ती हैं। मंगलवार की सुबह तक वहां भर्ती मरीजों की संख्या 30 थी, जिसमें से 17 छुट्टी कराकर घर लौट गए। जीएमसीएच 32 के अधीन संचालित इस अस्पताल का लाभ अब भी मरीजों को पूरी तरह नहीं मिल पा रहा है। जीएमसीएच 32 में विज्ञापन के बावजूद विशेषज्ञों के खाली पदों को भरने के लिए उम्मीदवार नहीं मिल रहे हैं।
दिक्कत तो है रेफर होकर आए मरीजों को लौटा नहीं सकते
रेफर मरीजों का दबाव बढ़ने के कारण स्थिति खराब हो रही है।हम रेफर मरीज को बिना इलाज के वापस नहीं कर सकते, जबकि बेड की संख्या बेहद सीमित है। ऐसे में स्ट्रेचर पर भर्ती करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। वार्ड में जैसे-जैसे बेड खाली होता है, इमरजेंसी के मरीजों को वहां शिफ्ट किया जाता है। -
डॉ. सुधीर गर्ग, चिकित्सा अधीक्षक जीएमसीएच 32