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चंडीगढ़: तीसरी लहर से बचाव की हो रही पूरी तैयारी, गैर कोविड मरीजों पर पड़ रही भारी

Fri, 06 Aug 2021 09:46 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पीजीआई प्रशासन तीसरी लहर के लिए सितंबर तक इंतजार करने के बाद ही स्थिति सामान्य रहने पर कुछ निर्णय लेगा। ऐसे में पीजीआई के कोविड अस्पताल में भी मौजूदा समय में 100 बेड तीसरी लहर की आशंका पर आरक्षित रखे गए हैं।
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सेक्टर 45 स्थित सरकारी अस्पताल। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बेशक कोरोना की तीसरी लहर से बचाव व इलाज की व्यवस्था पर चंडीगढ़ प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग बेहद सजग है, लेकिन आने वाले खतरे की आशंका पर मौजूदा स्वास्थ्य सुविधाओं पर रोक लगा दी गई है। पीजीआई समेत शहर के अन्य सरकारी अस्पतालों में कोविड की तीसरी लहर के लिए 551 बेड आरक्षित रखे गए हैं। इससे गैर कोविड मरीजों को इलाज के लिए यहां-वहां भटकना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि यह अव्यवस्थित कार्ययोजना का परिणाम है कि संक्रमण दर शून्य पर आने के बावजूद गैर कोविड मरीज इलाज के लिए इंतजार ही कर रहे हैं। 

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इन अस्पतालों में इलाज हुआ मुश्किल
स्वास्थ्य विभाग के निर्देश पर मौजूदा समय में जीएमएसएच-16 में कोविड के नाम पर सबसे ज्यादा 242 बेड आरक्षित हैं। ऐसे में अन्य विभागों के मरीजों को भर्ती करने के लिए बेड की कमी परेशानी का सबब बनी हुई है। सेक्टर- 48 के 100 बेड के अस्पताल को कोविड अस्पताल घोषित कर वहां ताला लगा दिया गया है। जीएमसीएच-32 से स्थानांतरित किए गए कैंसर, ईएनटी और मनोरोग के मरीज इलाज के लिए भटक रहे हैं। इतना ही नहीं सेक्टर- 45 के सिविल अस्पताल में लेबर रूम हटाकर बच्चों के लिए आईसीयू बनाया गया है। दो महीने पहले वहां प्रसव की सुविधा बंद कर दी गई है। वहीं कोविड वार्ड के नाम पर वहां 42 बेड आरक्षित किए गए हैं। 

पीजीआई सितंबर के बाद लेगा निर्णय

पीजीआई प्रशासन तीसरी लहर के लिए सितंबर तक इंतजार करने के बाद ही स्थिति सामान्य रहने पर कुछ निर्णय लेगा। ऐसे में पीजीआई के कोविड अस्पताल में भी मौजूदा समय में 100 बेड तीसरी लहर की आशंका पर आरक्षित रखे गए हैं। अन्य बेड हेपेटॉलजी और रेडियोथैरेपी के मरीजों के लिए खोल दिया गया है जबकि ओपीडी में टेली कंसल्टेशन के जरिए पंजीकरण के मानक का पालन किया जा रहा है। वहीं जीएमसीएच- 32 में तीसरी लहर की आशंका पर मौजूदा ओपीडी में प्रति घंटे प्रति डॉक्टर महज 6 मरीज देखने का मानक तय किया गया है। ऐसे में मरीजों को इलाज के लिए अब भी अस्पताल के धक्के खाने पड़ रहे हैं। 

मरीजों की सुनने वाला कोई नहीं 
मेरा इलाज सेक्टर- 45 के सिविल अस्पताल में चल रहा था। लेबर रूम बंद होने क कारण मुझे जीएमएसएच- 16 में रेफर कर दिया गया है। परेशानी बढ़ी तो रात में जीएमएसएच-16 पहुंचे। वहां से सेक्टर- 22 रेफर कर दिया गया। ऐसे तो मरीज को इलाज के बजाय परेशान करने का काम किया जा रहा है। -नंदिनी कुमारी, सेक्टर- 45

मेरे रिश्तेदार की पित्त की थैली की पथरी की सर्जरी करवानी है। जून में जीएमएसएच- 16 में दिखाया तो जुलाई में डेट देने की बात कही गई थी। लेकिन अब जाने पर पता चला कि अगस्त तक की डेट फुल हो चुकी है।  -दिनेश शर्मा, डड्डूमाजरा
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एक नजर कोविड की मौजूदा स्थिति और तीसरी लहर की तैयारियों पर

शहर में सक्रिय केस की संख्या- 31
भर्ती मरीजों की संख्या- 17
14 वार्ड में और तीन आईसीयू में भर्ती

पीजीआई- 100 बेड आरक्षित, 13 मरीज भर्ती 
जीएमसीएच- 32 - 67 बेड आरक्षित, एक भी मरीज नहीं
जीएमएसएच- 16- 424 बेड आरक्षित, 4 मरीज भर्ती 
सेक्टर- 45 सिविल अस्पताल - 42 बेड आरक्षित, एक भी मरीज नहीं
सेक्टर- 48 कोविड अस्पताल -100 बेड आरक्षित, एक भी मरीज नहीं

कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है। इसलिए पीजीआई की ओपीडी और इनडोर को लेकर जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। केंद्र के निर्देश पर कोविड अस्पताल बनाया गया था, उससे जुड़ा कोई भी निर्णय पीजीआई अपने स्तर पर नहीं ले सकता। -प्रो. जगतराम, निदेशक पीजीआई

गैर कोविड मरीजों के लिए ओपीडी का संचालन काफी पहले से किया जा रहा है। जहां तक बेड आरक्षित करने की बात है तो आपात स्थिति को ध्यान में रखकर ऐसा किया गया है। तय समय के बाद स्थिति पुन: सामान्य कर दी जाएगी।  -डॉ. अमनदीप कंग, स्वास्थ्य निदेशक 

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