शहर के होटल और रेस्त्रां अब उपभोक्ताओं से किसी तरह का सर्विस चार्ज नहीं ले पाएंगे। इस संबंध में शुक्रवार को प्रशासन के आबकारी एवं कराधान विभाग ने आदेश जारी किया है।
अगर कोई होटल या रेस्त्रां ऐसा करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इससे शहर के होटलों और रेस्त्रां में लोगों का खाने का बिल अब पहले की तुलना में कम आएगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी तरह से उपभोक्ता पर निर्भर करेगा कि वह रेस्त्रां की ओर से दी गई सेवा के बदले में कितनी टिप देना चाहता है। ऐसे में उससे जबरदस्ती सर्विस चार्ज नहीं लिया जा सकता है।
आबकारी एवं कराधान विभाग के अधिकारियों के अनुसार शहर के कुछ होटल और रेस्त्रां अपनी मरजी से खाने के बिल पर सर्विस चार्ज लगा रहे थे। जबकि ऐसा काई कानून नहीं है जिसके तहत होटल या रेस्त्रां सर्विस चार्ज ले सकते हैं। कई बार उपभोक्ता सर्विस चार्ज देने को लेकर संतुष्ट नहीं होता है लेकिन उसके बाद भी उससे जबरदस्ती यह चार्ज लिया जाता है जिससे उसका खाने का बिल बढ़ जाता है।
शहर के कई रेस्त्रां अवैध तरीके से 5 से 10 फीसदी तक सर्विस चार्ज वसूल रहे थे। यह चार्ज सरकारी खाते में जमा न होकर रेस्त्रां या होटलों के खाते में जमा होता था। 5 नवंबर, 2012 को यूटी के प्रशासक के जन सुनवाई सत्र में शहर के प्रमुख वकील अजय जग्गा ने प्रशासक से इस अवैध वसूली की शिकायत की थी। उन्होंने जानकारी दी थी कि सर्विस चार्ज के अलावा भी कई तरह के टैक्स ग्राहक से गलत तरीके से वसूले जा रहे हैं।
प्रशासक ने इस शिकायत की जांच का आदेश उपायुक्त को देते हुए पूरी रिपोर्ट तैयार करने को कहा था। पाटिल के निर्देश के बाद भी जब प्रशासन ने इस मामले में कुछ नहीं किया तो जग्गा गृह सचिव अनिल कुमार से मिले। अनिल कुमार ने उपायुक्त मोहम्मद शाईन को पत्र लिखकर इस मामले की जांच करने को कहा।
कुछ दिनों बाद जग्गा इस मामले को लेकर फिर प्रशासक के सलाहकार केके शर्मा से मिले। लगभग दो सालों से जग्गा प्रशासन के सामने होटलों और रेस्त्रां की ओर से सर्विस चार्ज के नाम पर की जा रही अवैध वसूली का मुद्दा उठा रहे हैं। अब जग्गा के शिकायत करने के लगभग दो साल के बाद प्रशासन ने यह आदेश जारी किया है।