हरियाणा के मेडिकल कालेजो में दाखिले के दौरान सामान्य श्रेणी की सीटों से 10 प्रतिशत आरक्षण को अलग कर आर्थिक तौर पर पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित करने के ममाले पर पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है।
हाईकोर्ट ने वर्तमान में चल रही काउंसलिंग प्रक्रिया में इस कोटे के तहत लाभ देने पर भी रोक लगाई है। हाईकोर्ट द्वारा लगाई गई रोक के साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि जो छात्र इसका लाभ पा चुके हैं उन्हें भी इसके चलते इस सत्र में प्रवेश नहीं दिया जा सकता है।
इस मामले में फरीदाबाद निवासी राजेश्वर सिंह ने एडवोकेट यज्ञदीप और एडवोकेट सुमित गोयल के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि हरियाणा में एमबीबीएस की सीट पर प्रवेश के दौरान 10 प्रतिशत सीट आर्थिक तौर पर पिछड़े परिवारों से आने वाले छात्रों के लिए आरक्षित की गई है।
याची ने कहा कि इस फैसले के चलते सामान्य श्रेणी के छात्रों के साथ अन्याय हो रहा है और साथ ही यह सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की भी उल्लंघना है। 10 प्रतिशत सीटे आर्थिक पिछड़ा वर्ग को देने के चलते हरियाणा में आरक्षण 50 प्रतिशत की सीमा पार कर चुका है।
याचिकाकर्ता ने एमबीबीएस में प्रवेश के लिए आवेदन किया हुआ है और हाईकोर्ट से अपील करते हुए कहा कि आर्थिक तौर पर पिछड़े व्यक्ति के लिए जो सीट रिजर्व की गई है वो रद्द की जाए।