जाट आरक्षण को लेकर सोनीपत में महापंचायत
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि क्यों न हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान दर्ज सभी एफआईआर की जांच सीबीआई को सौंप दी जाए। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को 24 सितंबर तक जवाब पेश करने को कहा है।
उधर, सीबीआई से पूछा है कि मामले की जांच कर सकती है या नहीं। जाट आंदोलन के दौरान मुरथल गैंगरेप पर संज्ञान के एक मामले में वीरवार को हुई सुनवाई के दौरान वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के भाई सत्यपाल संधू की ओर से दायर एक अर्जी में हरियाणा पुलिस पर सवालिया निशान लगाया गया।
इसमें आरोप है कि जाट नेताओं के दबाव में हरियाणा सरकार उनकी संपत्ति को आग के हवाले करने वालों की गिरफ्तारी नहीं कर रही है। बहस के दौरान संधु के वकील ने कोर्ट को बताया कि जाट आंदोलन के दौरान दंगाइयों ने उनकी प्रेस, घर, गोदाम और फैक्ट्री में आग लगा दी, लेकिन पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर रही है।
इस संबंध में 25 फरवरी को एफआईआर दर्ज किया गया था, लेकिन पुलिस के हाथ खाली हैं। इलाका मजिस्ट्रेट ने घटना के बाद पुलिस रिकॉर्ड की जांच के दौरान कहा था कि पुलिस ने न तो इस मामले के आरोपियों से पूछताछ की और न ही अन्य अज्ञात की तलाश की गई।
संधू के वकील के आरोप लगाया कि सरकार ने वोट बैंक के लिए जाट नेताओं की गिरफ्तारी नहीं किए जाने का आश्वासन दे रखा है, इसलिए आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।