याची ने कहा कि लव जिहाद के नाम पर उसे फंसाया जा रहा है। जो वीडियो पुलिस के पास है उसमें आरोपियों का मुंह पूरी तरह से ढका हुआ था और नंबर प्लेट तो कोई भी बदल सकता है। केवल ऐसी वीडियो के आधार पर पुलिस ने जल्दबाजी दिखाते हुए मुझे गिरफ्तार कर लिया। याची ने कहा कि यह मामला लव जिहाद का नहीं बल्कि ऑनर किलिंग का है। याची ने कहा कि उसके पास ऐसी कोई वजह नहीं थी जिसके कारण वह निकिता की हत्या करे।
कोर्ट ने याची की यह दलील सिरे से नकार दी कि नेताओं, मीडिया और पंचायत के दबाव में जांच प्रभावित हुई है। जांच का केवल 11 दिनों में पूरा होना और चालान पेश करना हाईकोर्ट ने खामी नहीं मानी। फॉरेंसिक रिपोर्ट के बिना चालान पेश करने की दलील पर हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस चाहे तो रिपोर्ट आने के बाद सप्लीमेंट्री चालान पेश कर सकती है।
यह था मामला
हरियाणा के बल्लभगढ़ में परिवार के साथ रह रही उत्तर प्रदेश के हापुड़ निवासी निकिता तोमर अग्रवाल कॉलेज में बीकॉम अंतिम वर्ष की छात्रा थी। 26 अक्तूबर 2020 की शाम वह परीक्षा देकर कॉलेज के बाहर निकली। आरोप के अनुसार इसी दौरान सोहना निवासी तौसीफ ने अपने दोस्त के साथ मिलकर निकिता को कार में अगवा करने की कोशिश की। विरोध करने पर निकिता को गोली मार दी थी। अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने जांच एसआईटी को सौंप दी थी।