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Amritpal: अमृतपाल का नशा मुक्ति केंद्र भी फ्रॉड, न रजिस्ट्रेशन, न डॉक्टर...एक भी युवा नहीं हुआ नशा मुक्त

Sun, 30 Apr 2023 12:45 PM IST
निवेदिता वर्मा पंकज शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर

सार

एसपी तेजबीर सिंह का कहना है कि गांव जल्लूपुर खेड़ा के गुरुद्वारा के पास अमृतपाल की जत्थेबंदी की ओर से जो नशा मुक्ति केंद्र बनाया गया था वो रजिस्ट्रर्ड भी नहीं था। जबकि किसी तरह का भी नशा मुक्ति केद्र खोलने के लिए सरकार की ओर से निर्धारित मापदंड पूरे किए जाते है।
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अमृतपाल सिंह। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह दावा करता था कि वह युवाओं का नशा छुड़वा रहा है। लेकिन सच यह है कि अमृतपाल के गांव जल्लूपुर खेड़ा में गुरुद्वारा के पास एक शेड डाल कर बनाए नशा मुक्ति केंद्र में एक भी युवा नशा नहीं छोड़ पाया है। वहीं पुलिस जांच के दौरान सामने आया है कि अमृतपाल के साथ जो युवा गनमैन बन कर चलते थे वह भी अलग-अलग तरह का नशा सेवन करते थे। यह खुलासा अमृतसर ग्रामीण के एसपी तेजबीर सिंह की ओर से किया गया है। 

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अजनाला हमले के बाद से खाली पड़ा केंद्र
एसपी तेजबीर सिंह भी उस टीम में शामिल हैं जो अमृतपाल के सारे मामले की अलग-अलग पहलुओं पर जांच कर रही है। यह नशा मुक्ति केंद्र अमृतपाल के लिए फंड इकट्ठा करने का साधन था। इसकी जांच भी एजेंसियां कर रही हैं। अमृतपाल के भूमिगत होने से उसकी गिरफ्तारी तक इस केंद्र में कोई भी युवा नहीं है। अजनाला घटना के बाद से ही युवक यहां से चले गए थे। इस नशा केंद्र को अमृतपाल सिंह मोगा में गांव जोगेवाला के गुरुद्वारा साहिब में शिफ्ट करना चाहता था ताकि इसके नाम तले और अधिक फंड जुटाया जा सके।

एसपी तेजबीर सिंह का कहना है कि गांव जल्लूपुर खेड़ा के गुरुद्वारा के पास अमृतपाल की जत्थेबंदी की ओर से जो नशा मुक्ति केंद्र बनाया गया था वो रजिस्ट्रर्ड भी नहीं था। जबकि किसी तरह का भी नशा मुक्ति केद्र खोलने के लिए सरकार की ओर से निर्धारित मापदंड पूरे किए जाते है। इस सेंटर में न कोई क्वालीफाइड डाक्टर था, ना ही कोई स्टाफ, न कोई मनोरोग डाक्टर, न ही काउंसिलर और न ही पैरामेडिकल स्टाफ आदि की कोई व्यवस्था था। बैड व दवाओं की भी कोई व्यवस्था नहीं थी। जो युवा आते थे, वह नीचे दरियों पर ही सोते थे।

नशा छुड़वाने आए युवक बने अमृतपाल के गनमैन
गांव जल्लूपुर खेड़ा के नशा मुक्ति केंद्र से कोई भी युवक ऐसा सामने नहीं आया है जिसने वहां से नशा छोड़ा हो। बल्कि वहां नशा छुड़वाने के लिए गए युवक अमृतपाल के गनमैन जरूर बन गए। उनमें कई हेरोइन, भुक्की और अफीम का नशा करते थे। इनकी गिरफ्तारी के बाद सब कुछ सामने आया है। अमृतपाल नशा छुड़वाने की आड़ में अपनी निजी सेना एकेएफ तैयार कर रहा था।
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फार्मासिस्ट देता था सिरदर्द और कमजोरी की दवा
एसपी तेजबीर सिंह ने खुलासा किया है कि जब अमृतपाल ने खालसा वहीर शुरू की थी तो तब एक फार्मासिस्ट उनके संपर्क में आया था। जो एक गांव में मेडिसिन की दुकान चलाता था। उसे अमृतपाल ने बुलाकर कहा था कि वह नशा छुड़ाओ केंद्र खोल रहे हैं, तुम वहां दवाएं सप्लाई किया करो और युवाओं को इलाज करो। उस युवक ने अमृतपाल को कहा था कि वह क्वालीफाइड नशा छुड़ाओ डाक्टर नहीं है। इस पर उसे कहा गया कि वह दर्द, कमजोरी, सिरदर्द आदि की दवाएं दे दिया करे। वह यही दवाएं देता था और इसके लिए काफी फीस भी लेता रहा। अभी तक ऐसा कोई भी केस सामने नहीं आया है जो इस नशा छुड़ाओ केंद्र से नशा छोड़ कर गया हो।

तेजबीर सिंह ने खुलासा किया कि नशा छुड़वाने की आड़ में अमृतपाल नशे के आदी युवाओं के साथ संपर्क करके उन्हें अपने पीछे अपनी मुहिम को तेज करने के लिए लगा लेता था। असल में गांव जल्लूपुर खेड़ा के भी कई युवा नशे के शिकार हैं। वहां भी पहले काफी नशा बिकता रहा है। जिस पर अब पुलिस ने सख्ती अपना कर कंट्रोल किया है। उन्होंने कहा कि अभी तक पुलिस ने अमृतपाल के कथित गनमैनों से 12 बोर की 6 राइफल, 315 बोर की एक राइफल, 32 बोर का एक रिवाल्वर, 32 बोर का एक पिस्टल, 12 बोर के 25 कारतूस, 315 बोर के 13 कारतूस, 32 बोर रिवाल्वर के 18 कारतूस, 32 बोर पिस्टल के 12 कारतूस आदि हथियार पकड़े हैं। अमृतपाल का नशा छुड़ाओ केंद्र कोई भी सेहत विभाग की ओर से तय बेसिक नियमों को पूरा नहीं करता था। जांच हो रही है कि इस केंद्र की आड़ में एकेएफ बनाने के साथ ही अमृतपाल का और क्या मकसद था।  
 
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