कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट में जत्थेदार ज्ञानी रंजीत सिंह गौहर को क्लीन चिट दे दी है। सरचंद सिंह ने कहा कि मामला तख्त साहिब के जत्थेदार से जुड़ा होने के कारण संवेदनशील है और तख्त साहिब की मर्यादा और सिख भावनाओं से जुड़ा है। जांच कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि ‘श्री साहिब‘ कथित तौर पर ज्ञानी रणजीत सिंह गौहर द्वारा तैयार किया गया था, और न ही यह कि डॉ. समरा और ज्ञानी रणजीत सिंह गौहर के बीच कोई पैसे का लेन-देन हुआ था।
जत्थेदार रणजीत सिंह को श्री साहिब बनाने के लिए 70 लाख रुपये देने के बारे में डॉ. समरा कोई सबूत पेश नहीं कर सके। एक किलो सोने की कीमत 49 लाख रुपये के आसपास है, यह जानने वाले डॉ. समरा के लिए यह संभव नहीं है कि वह इसके लिए 70 लाख रुपये दें। रिपोर्ट में यह भी विवरण दिया गया है कि डॉ. समरा के इस दावे में कोई सच्चाई नहीं है कि उन्होंने अप्रैल 2022 के पहले-दूसरे सप्ताह में श्री गुरु तेग बहादुर अस्पताल करतारपुर स्थित अपने आवास पर परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में ज्ञानी रणजीत सिंह गौहर को 70 लाख नकद दिए गए जबकि जत्थेदार गौहर ने 31 मार्च, 2022 से 14 अप्रैल, 2022 तक के कार्यक्रमों के लिए विभिन्न एयरलाइंस के हवाई टिकट और बोर्डिंग पास के अलावा मोबाइल टेलीफोन लोकेशन पेश कर डॉ. समरा के आरोपों का खंडन किया है। कमेटी ने स्वर्ण दान स्वीकार करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का सख्ती से पालन न करने के लिए तख्त श्री पटना साहिब कमेटी की भी खिंचाई की है।