निगम ने घरों से कचरा लेने के लिए शहर में गाड़ियां संचालित कर दीं हैं लेकिन गाड़ियों को लेकर असमंजस है। पानी के बिल के साथ जुड़कर आ रहे कचरे के शुल्क को लेकर लोगों में नाराजगी है। इस व्यवस्था को ठीक करना आयुक्त की जिम्मेदारी होगी।
राजनीतिक पार्टियों से तालमेल
पूर्व आयुक्त केके यादव से भाजपा व कांग्रेस के कई पार्षदों से बवाल हुआ था। बवाल के बाद आयुक्त सदन की बैठक छोड़कर भी निकल चुके हैं। मामला प्रशासक के पास तक पहुंचा था। पार्षद अपने क्षेत्र के कार्यों को कराना चाहेंगे। पार्षदों से तालमेल बनाना बड़ी चुनौती होगी।
स्मार्ट घड़ी बांधने, फील्ड में कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने, सफाई का निजीकरण करने जैसे मुद्दों पर कर्मचारी व आयुक्त के बीच हमेशा तनातनी रही। इस दौरान कर्मचारी हड़ताल तक पर चले गए। कर्मचारियों के साथ तालमेल बनाने की आयुक्त को रणनीति बनानी होगी।
कचरा निस्तारण प्लांट
शहर के कचरे का निस्तारण सबसे बड़ी चुनौती है। निगम ने प्लांट तो ले लिया लेकिन उसे चला नहीं सका। अब निगम गीले कचरे की मशीन को अपग्रेड करने और सूखे कचरे की नई मशीन लगाने की योजना बना रहा है, जो पिछले सात माह से कागजों में ही है।
सफाई व्यवस्था को संभालना होगा
शहर में लॉयंस कंपनी का ठेका खत्म होने वाला है। सेक्टर एक से लेकर 30 तक की भी पार्षद सफाई के निजीकरण की बात कर रहे हैं। कुछ पार्षदों ने लॉयंस का समर्थन किया था। स्वच्छता अभियान में लगातार गिरती रैंक को सुधारने के लिए व्यवस्था करनी होगी।