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पीजीआई में न्यूरो मरीजों को मिलेगी विशेष सुविधा, जल्द लगेगी एमआरआई मशीन

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चंडीगढ़। पीजीआई में एमआरआई के मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए न्यूरो सर्जरी विभाग में अलग से मशीन लगाने की योजना बनाई गई है। जल्द ही न्यूरो सर्जरी के मरीजों को इसका लाभ मिलने लगेगा। वहां भी रेडियोडाइग्नोसिस विभाग के ही कर्मचारी एमआरआई करेंगे। खास बात यह है कि वहां सिर्फ न्यूरो के मरीजों की ही जांच होगी। पीजीआई प्रशासन का कहना है कि ट्रामा और इमरजेंसी में न्यूरो के मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा होने के कारण यह निर्णय लिया गया है। इससे जहां एक ओर न्यूरो सर्जरी के मरीजों को जांच में देरी जैसी परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी, वहीं रेडियो डाइग्नोसिस विभाग में दबाव कम होने से ओपीडी के मरीजों को भी ज्यादा लंबी डेट देने की नौबत नहीं आएगी।
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कोविड के नियंत्रण में आने के बाद से पीजीआई की ओपीडी में मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। मौजूदा समय में एक दिन की ओपीडी में 8 हजार से 9 हजार मरीज देखे जा रहे हैं। इस स्थिति ने जांच काउंटरों पर काफी भीड़ बढ़ा दी है। खासतौर पर एमआरआई जैसी महंगी जांच मरीज निजी सेंटरों की बजाय पीजीआई में कराने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन वेटिंग लंबी होने के कारण उन्हें निराशा हाथ लग रही है।
इनसेट
ओपीडी में अगले साल की डेट
पीजीआई में एमआरआई जांच की ये स्थिति है कि मरीजों को एक-दो महीने की बजाय अब अगले साल की डेट दी जाने लगी है। ओपीडी में आने वाले मरीज इसे लेकर काफी परेशान हैं। गौरतलब है कि पीजीआई में किसी भी प्रकार की एमआरआई के लिए 2500 रुपये का शुल्क तय है जबकि उसी जांच के लिए मरीजों को निजी सेंटरों में पांच हजार से आठ हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।
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इनसेट-
चार मशीन हजारों मरीज
पीजीआई में मौजूदा समय में एमआरआई की चार मशीन क्रियाशील है। पांचवीं मशीन कंडम घोषित हो गई है। उसकी जगह पर नई मशीन मंगाई जा चुकी है, लेकिन उसे इंस्टॉल करने की प्रक्रिया में अभी दो से ढाई महीने लगेंगे जबकि पीजीआई में एक दिन की ओपीडी में करीब 9 हजार मरीज देखे जा रहे हैं। वहीं इमरजेंसी और ट्रामा में 24 घंटे में 700 से 800 मरीज भर्ती किए जा रहे हैं। ऐसे में रेफरल सेंटर होने के कारण लगभग 70 से 80 प्रतिशत मरीजों को एमआरआई जैसी जांच करानी जरूरी होती है।
कोट-
पीजीआई में न्यूरो सर्जरी के मरीजों के बढ़ते दबाव को देखते हुए उनके लिए एक अलग एमआरआई मशीन लगाने की योजना बनाई गई है। न्यूरो सर्जरी विभाग में भी रेडियोडाइग्नोसिस के ही स्टाफ जांच करेंगे। वहां सिर्फ न्यूरो के मरीजों की जांच होगी। इससे रेडियोडाइग्नोसिस विभाग में मरीजों का दबाव कम होगा।
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-प्रो. एमएस संधू, प्रमुख रेडियोडाइग्नोसिस विभाग पीजीआई
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