चंडीगढ़। अफसरों की लापरवाही खुड्डालाहौरा कॉलोनी के लोगों के लिए एक बार फिर से तबाही ले आई है। मंगलवार देर रात फिर से खुड्डालाहौरा कॉलोनी में लगभग 80 घरों में पानी घुस गया। तड़के पहुंचे कर्मचारियों ने सफाई कर पानी को घरों व कॉलोनी से बाहर निकाला, लेकिन सुबह फिर से पानी बढ़ा और घरों में घुस गया। मौके पर पहुंचे एडीसी केपीएस माही ने कॉज वे तोड़ने के निर्देश दिए। उसके बाद पानी तेजी से निकला। पटियाला की राव और किशनगढ़ में बाढ़ को लेकर 14 जून के अंक में अमर उजाला ने प्रशासन और निगम के अधिकारियों को चेताया भी था, लेकिन अफसर नहीं चेते।
पिछले साल भी मानसून में पहाड़ों में हुई तेज बारिश के कारण देर रात पटियाला की राव में बाढ़ आ गई थी। इस कारण 60 से ज्यादा घरों में पानी घुस गया था। डीसी सहित निगम के अधिकारी व तत्कालीन मेयर भी मौके पर पहुंची थीं। समस्या को सुलझाकर लोगों को राहत देने का भी वादा किया, लेकिन इस साल सफाई क्नाम पर प्रशासन ने महज खानापूर्ति हुई, निगम ने भी पाइप शिफ्ट करने का आधा ही काम किया। पटियाला की राव में चंडीगढ़ के क्षेत्र में सिल्ट, घास और कचरा पड़ा हुआ था। वहीं, बोटेनिकल गार्डन के लिए बनाए गए कॉज-वे के नीचे डाली गई पाइपों में भी कचरा भरा रहता है, जिससे हर बार पानी रुकता है। यहीं से पानी बैक मारकर खुड्डालाहौरा गांव व कॉलोनी में घुसता है। इसके विपरीत पंजाब में समय से सफाई होने के कारण नयागांव क्षेत्र में कभी बाढ़ नहीं आती है। पिछले साल हुई तेज बारिश के कारण देर रात गांव में पानी भर गया था। निगम व प्रशासन के अधिकारियों ने अगले दिन गांव का निरीक्षण किया और बाढ़ से बचाव के लिए योजना भी बनाई, लेकिन एक साल गुजरने के बाद भी वह कागजों में रह गई।
वित्तीय समस्या फिर आई आड़े, पाइप बदलने का काम रह गया अधूरा
प्रशासन के चीफ इंजीनियर सीबी ओझा ने कहा था कि निगम की ओर से स्टॉर्म वॉटर लाइन नदी में ऊपर से सीधे डाल दी गई है। इन स्टॉर्म पाइप को गहराई में बिछाकर ही नदी में डाला जाए। इससे बरसाती पानी कॉलोनी में बैक नहीं मारेगा। वहीं, निगम ने सीवर पाइप लाइन बदलने की भी योजना बनाई थी। निगम व प्रशासन ने इन बिंदुओं पर योजना भी बनाई थी। निगम के चीफ इंजीनियर शैलेंद्र सिंह ने बताया कि सीवर पाइप लाइन बिछाने का काम लगभग पूरा हो गया है। वित्तीय समस्या के कारण स्टॉर्म वाटर लाइन बदलने का काम शुरू नहीं हो सका है।
समस्या होने पर फोन भी नहीं उठाते अधिकारी
मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि पिछले साल रात को लगभग ढाई बजे गांव में पानी घुस गया था। अफसरों व कर्मचारियों को काफी फोन लगाए, लेकिन किसी ने नहीं उठाया। उस समय ऐसा लगा जैसे जान पर बन आई थी। अगले दिन बाढ़ की भयावहता अधिकारियों ने अपनी आंखों से भी देखी, लेकिन फिर भी गंभीरता नहीं दिखाई। एक साल बीतने पर जब समस्या का निस्तारण नहीं हुआ तो कुछ दिन पहले गांव के लोगों ने प्रदर्शन भी किया था, लेकिन अधिकारी नहीं जागे।
तोगा पुल पर तेज बहाव में बह गई गाड़ी
मुल्लांपुर की ओर जाने वाले मार्ग पर पड़ने वाले तोगा पुल पर बुधवार तड़के तेज बहाव के साथ एक चारपहिया वाहन बह गया। गाड़ी में बैठे लोगों ने किसी तरह अपनी जान बचाई। उसके बाद मलोया कॉलोनी के सामने से जाने वाली सड़क पर भी एक पुल के ऊपर से पानी बह रहा था। पुलिस ने दोनों रास्तों को बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया।
तेज हवा में गिर गए पेड़
सेक्टर-3 और 11-10 डिवाइडिंग रोड पर तेज हवा केकारण पेड़ टूटकर गिर गए। पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर रास्तों को रोका। निगम के बागवानी विभाग ने पेड़ों को सड़क किनारे करके मार्ग को साफ कराया।