पटियाला के गांव मोही खुर्द के जसविंदर सिंह महज 32 साल की आयु में कारगिल युद्ध लड़ते हुए शहीद हो गए थे। उस समय उनकी पत्नी गर्भवती थी। शहादत के बाद जसविंदर के घर बेटे का जन्म हुआ था। बचपन से अपने पिता की बहादुरी के किस्सों का सुन बड़े हुए हरदीप सिंह में भी देशसेवा का जज्बा बचपन से था। पिता की ही तरह वे भी फौज में भर्ती हो गए हैं और इन दिनों 16 सिख रेजीमेंट में बतौर सिपाही असम में तैनात हैं।
शहीद जसविंदर के भाई व गांव के मौजूदा सरपंच तेजिंदर सिंह ने बताया कि जसविंदर सिंह 17 सिख रेजीमेंट में बतौर नायक नौशहरा बार्डर पर तैनात थे। तीन अक्तूबर 2000 को दोनों तरफ से खूब गोलीबारी हुई। इसी बीच पाकिस्तान की तरफ से सिख रेजीमेंट के जवानों पर ग्रेनेड फेंका गया, जिसमें उनका भाई नायक जसविंदर सिंह बुरी तरह से घायल हो गया। बावजूद इसके वह आखिरी सांस तक मोर्चे पर डटे रहे।
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सरपंच ने बताया कि जसविंदर सिंह ने करीब 12 साल 9 महीने फौज में देश की सेवा की। उनके परिवार में पहले कोई फौज में नहीं था। नायक जसविंदर सिंह की शहादत के समय उनकी दो बेटियां छोटी थीं और बेटा मां के गर्भ में था। शहीद जसविंदर सिंह की पत्नी हरविंदर कौर ने बड़ी हिम्मत के साथ खुद व बच्चों को संभाला। बाद में उन्हें राजपुरा एसडीएम दफ्तर में सुपरिंटेंडेंट की नौकरी मिल गई। अब शहीद जसविंदर सिंह की दोनों बेटियों की शादी हो चुकी है। बेटा हरदीप सिंह जस्सी भी जवान हो चुका है। पिता की तरह उनमें भी देश सेवा का जज्बा बचपन से ही कूट-कूट कर भरा है। पिता की वीरता के किस्से सुनते वह बड़ा हुआ। वह भी फौज में भर्ती हो गया है। तेजिंदर सिंह का कहना है कि उन्हें भाई की शहादत पर नाज है। अब उन्हीं की तरह बेटा भी देश की सेवा कर रहा है।