सिद्धू ने कहा कि बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र बढ़ाने जैसे फैसले लेने से पहले जरूरी होता है कि केंद्र पहले राज्य सरकारों से राय ले। इस मामले में केंद्र ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने कहा कि केंद्र पंजाब में बैक डोर एंट्री करना चाहता है। उन्होंने कहा कि अगर बीएसएफ वाला फैसला लागू होता है तो पंजाब बर्बाद हो जाएगा। हमारे बच्चों को केंद्रीय एजेंसियां पकड़ लेंगी और वे लापता सूची में दिखाई देंगे, जैसा पूर्व में होता रहा है।
नोटिफिकेशन पर उठाए सवाल
सिद्धू ने कहा कि जब केंद्र ने बीएसएफ संबंधी फैसला लिया तो पंजाब सरकार ने इसका कड़ा विरोध किया। इसके बावजूद केंद्र ने अपने फैसले का नोटिफिकेशन जारी कर दिया। सिद्धू ने सवाल उठाया कि जब विरोध हो रहा था तो नोटिफिकेशन जारी करने का क्या औचित्य है? उन्होंने कहा कि केंद्र को राज्यों के अधिकारों को छीनने नहीं देंगे और न ही हम केंद्र के आगे झुकेंगे।
बंगाल में बीएसएफ की ज्यादतियां गिनाईं
सिद्धू ने पश्चिम बंगाल में बीएसएफ की कार्यप्रणाली का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां ऐसे कई मामले हैं कि बीएसएफ गोलीबारी की घटनाओं के बाद स्थानीय पुलिस को सूचित नहीं करती। बंगाल सरकार ने बीते पांच वर्षों में बीएसएफ पर यातना के कुल 240 मामले, केस रफा-दफा करने के 60 मामले और लोगों को लापता कर दिए जाने के 8 आठ मामले दर्ज किए हैं। इनमें से 33 मामलों में एनएचआरसी ने पीड़ितों या उनके परिजनों को मुआवजे की सिफारिश की थी। सिद्धू ने कहा कि अगर यूपी पुलिस बिना किसी वैध कारण के 60 घंटे से अधिक समय तक प्रियंका गांधी को अवैध हिरासत में रख सकती है तो बीएसएफ द्वारा हिरासत में लिए जाने पर एक आम व्यक्ति की गारंटी कौन लेगा?