दरअसल नवजोत सिद्धू सीएम बनना चाहते थे। कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफा देने के बाद उन्हें लगने लगा था कि ऐसा हो जाएगा लेकिन कांग्रेस हाईकमान सुनील जाखड़ के नाम को आगे बढ़ा रहा था। सिख सीएम बनने की बात के बाद सुखजिंदर रंधावा का नाम चर्चा में आया। सूत्रों के अनुसार, रंधावा के नाम का सिद्धू ने विरोध किया जिसके बाद सीएम की कुर्सी पर चरणजीत चन्नी को बैठाया गया। इसके बाद सिद्धू पर सुपर सीएम बनने के आरोप लगने लगे। फिर जब मंत्रिमंडल में और प्रशासनिक नियुक्तियों में सिद्धू की नहीं चली तो उन्होंने इस्तीफा दे दिया था।