चंडीगढ़। पंजाब कला भवन में रविवार को थिएटर फॉर थिएटर की ओर से 17वें नेशनल थियेटर फेस्टिवल का शुभारंभ हो गया। कार्यक्रम का आगाज सम्मान समारोह से हुआ। इस अवसर पर फिल्म अभिनेता लेखक और रंगकर्मी बलजीत सिंह जख्मी को लाइफ टाइम अचिवमेंट और युवा निर्देशक अभिनेता अभिषेक शर्मा को युवा शक्ति अवार्ड दिया गया। इस दौरान कई प्रमुख हस्तियों ने विचार रखे। स्वर्गीय केके डोडा और स्वर्गीय प्रवेश सेठी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को याद किया गया।
थिएटर फार थिएटर के अध्यक्ष मदन गुप्ता स्पाटू ने अतिथियों और कलाकारों का स्वागत किया। इस मौके पर चंडीगढ़ के रंगमंच पर प्रकाश डाला। चंडीगढ़ के दिग्गज रंगकर्मी और भंगड़ा किंग कहे जाने वाले बलकार सिद्धू ने कहा कि आयुष्मान खुराना, किरण खेर, मंगल ढिल्लों, अनुपम खेर सरीखे सफल बॉलीवुड अभिनेताओं के सपनों के पंख को इसी शहर के रंगमंच ने परवाज दी। पंजाबी रंगमंच की रानी कही जाने वाली रानी बलबीर कौर ने सेमिनार के दौरान कहा कि डिपार्टमेंट ऑफ इंडियन थिएटर ने उन्हें और उनके जैसे सैकड़ों प्रतिभावान रंगकर्मियों का प्रोफेशनल थिएटर करने का सपना सच हो सका। एक सफल प्ले राइट, अदाकार, निर्देशक और पंजाबी रंगमंच के पितामह बलवंत गार्गी ने डिपार्टमेंट ऑफ इंडियन थिएटर की नींव रखने के साथ ही चंडीगढ़ को रंगमंच का मक्का बनाने की ओर अग्रसर कर दिया था।
इसी दौरान चंडीगढ़ के पहले अभिनेता कहे जाने वाले कैलाश अहलूवालिया ने अपना सफर और अनुभव बयां किया। उन्होंने बताया कि 1954 में जब पढ़ाई के लिए वह चंडीगढ़ आए तब रंगमंच से जुड़ना हुआ। उन्होंने अधिकार का रक्षक नाटक में पलही बार प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा कि इस पत्थरों के शहर को रंगमंच का मक्का बनाने के लिए रंगकर्मियों ने वर्षों मेहनत की है और जिसका नतीजा है कि चंडीगढ़ में आज हर आयु वर्ग के निर्देशक और अनेकों थियेटर ग्रुप मौजूद हैं। डिपार्टमेंट ऑफ इंडियन थिएटर के हमसफर रहे प्रोफेसर महेंद्र कुमार ने कहा कि एक रंगकर्मी के लिए हर दिन कला धर्मी दिवस जैसा होना चाहिए। उन्होंने चंडीगढ़ के रंगमंच के उत्थान का पूरा श्रेय बलवंत गार्गी को दिया।