प्रत्येक अधिकृत परीक्षण स्टेशन वाणिज्यिक वाहनों को निर्माण के साल अनुसार जांचने में सक्षम होगा। जबकि, मोटर वाहन संशोधन अधिनियम 2019 में अनिवार्य है कि सभी वाणिज्यिक वाहनों की फिटनेस टेस्टिंग ऑटोमेटेड व्हीकल आईएंडसी केंद्रों के माध्यम से होगी। जिसे परिवहन विभाग ने पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया और ओईएम डीलर को वाहनों के फिटनेस परीक्षण करने व प्रमाणपत्र जारी करने के लिए 30-35 अथॉरिटी पत्र भी जारी कर दिए। सोई ने कहा कि हकीकत में इन डीलरों के पास सीएमवीआर में निर्धारित आवश्यक परीक्षण उपकरण नहीं हैं, न ही परीक्षण के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी हैं। यह सीएमवीआर नियम संख्या 176 का पूरी तरह से उल्लंघन है।
30 सितंबर को लिख चुके पत्र
कमल सोई ने बताया कि 30 सितंबर 2021 को परिवहन मंत्री और परिवहन आयुक्त को पत्र लिखा है। जिसमें केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्रालय की अप्रैल और सितंबर 2021 की दोनों अधिसूचनाओं के उल्लंघन को संज्ञान में लाया गया। परिवहन आयुक्त से मिलने का प्रयास किया लेकिन वह नहीं मिले। वाहन फिटनेस को निजी हाथों में कतई नहीं जाने देंगे। अगर सरकार ने निर्णय वापस नहीं लिया तो इसे रद्द कराने के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा। राजस्थान सरकार दो साल पहले यह प्रयोग कर चुकी, जो पूरी तरह विफल रहा। वहां जारी फिटनेस प्रमाण पत्रों की सीबीआई जांच भी जारी है।