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फिटनेस जांच निजी कंपनियों को सौंपने का विरोध: राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा परिषद ने कहा- गड़बड़ी की आशंका, भ्रष्टाचार बढ़ेगा

Wed, 27 Oct 2021 01:43 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

सड़क सुरक्षा परिषद के सदस्य ने सोमवार को परिवहन विभाग की प्रधान सचिव कला रामचंद्रन से मुलाकात कर इसकी शिकायत की। साथ ही पूर्व में लिखे पत्र का हवाला दिया। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस पर जल्दी बैठक बुलाकर चर्चा की जाएगी। सोई ने रामचंद्रन को बताया कि रोहतक का मॉडल फिटनेस सेंटर पूरे देश में नजीर है। इसकी तर्ज पर सरकार अपने सेंटर खोले व निजी कंपनियों को यह काम न सौंपे। इससे भ्रष्टाचार बढ़ेगा और फर्जी फिटनेस प्रमाण पत्र जारी होंगे, जिससे लोगों की जान खतरे में पड़ेगी।
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फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हरियाणा सरकार ने वाणिज्यिक वाहनों की फिटनेस जांच का जिम्मा निजी कंपनियों को सौंप दिया है। प्रदेश में 35 कंपनियां वाहन फिटनेस प्रमाण पत्र दे रही हैं। इनकी ओर से जारी प्रमाण पत्रों में गड़बड़ी की आशंका है। इसका खुलासा मंगलवार को यहां राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा परिषद के सदस्य डॉ. कमल सोई ने किया।

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उनके खुलासे से परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायतें मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री व प्रधान सचिव परिवहन के पास भी पहुंचीं हैं। परिवहन मंत्री मूल चंद शर्मा का कहना है कि निजी कंपनियों को वाहन फिटनेस जांच के लिए अधिकृत करने के निर्णय की समीक्षा कराई जाएगी। 

कमल सोई ने बताया कि वाहन फिटनेस प्रमाण पत्र बहुत महत्वपूर्ण है। इसे जारी करने का काम निजी कंपनियों को सौंपने से सड़क दुर्घटनाओं में इजाफा हो सकता है। इससे मोटर वाहन अधिनियम, 1998 की धारा 56 को प्रभावी ढंग से लागू करने में बाधा आ रही है। परिवहन आयुक्त ने 23 जून 2021 को सभी डीटीओ और आरटीए को निर्देश दिए कि वे ओईएम यानी ओरिजिनल इक्यूपमेंट मैन्युफैक्चरर डीलरों को वाहनों की फिटनेस का परीक्षण करने के लिए अधिकृत परीक्षण स्टेशन के रूप में अधिकृत करें। 

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प्रत्येक अधिकृत परीक्षण स्टेशन वाणिज्यिक वाहनों को निर्माण के साल अनुसार जांचने में सक्षम होगा। जबकि, मोटर वाहन संशोधन अधिनियम 2019 में अनिवार्य है कि सभी वाणिज्यिक वाहनों की फिटनेस टेस्टिंग ऑटोमेटेड व्हीकल आईएंडसी केंद्रों के माध्यम से होगी। जिसे परिवहन विभाग ने पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया और ओईएम डीलर को वाहनों के फिटनेस परीक्षण करने व प्रमाणपत्र जारी करने के लिए 30-35 अथॉरिटी पत्र भी जारी कर दिए। सोई ने कहा कि हकीकत में इन डीलरों के पास सीएमवीआर में निर्धारित आवश्यक परीक्षण उपकरण नहीं हैं, न ही परीक्षण के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी हैं। यह सीएमवीआर नियम संख्या 176 का पूरी तरह से उल्लंघन है।

30 सितंबर को लिख चुके पत्र
कमल सोई ने बताया कि 30 सितंबर 2021 को परिवहन मंत्री और परिवहन आयुक्त को पत्र लिखा है। जिसमें केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्रालय की अप्रैल और सितंबर 2021 की दोनों अधिसूचनाओं के उल्लंघन को संज्ञान में लाया गया। परिवहन आयुक्त से मिलने का प्रयास किया लेकिन वह नहीं मिले। वाहन फिटनेस को निजी हाथों में कतई नहीं जाने देंगे। अगर सरकार ने निर्णय वापस नहीं लिया तो इसे रद्द कराने के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा। राजस्थान सरकार दो साल पहले यह प्रयोग कर चुकी, जो पूरी तरह विफल रहा। वहां जारी फिटनेस प्रमाण पत्रों की सीबीआई जांच भी जारी है।
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