नेशनल एग्री फूड बॉयोटेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट यानी नाबी धान की पराली से बॉयोकोल बनाएगा। इस बायोकोल से सामान्य कोयले की अपेक्षा कार्बन उत्सर्जन 95 प्रतिशत कम होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वीडिश किंग कार्ल 16वें गुस्ताफ के साथ नई दिल्ली में इस परियोजना की शुरुआत की।
फसल की कटाई के दौरान धान की पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण से निपटने के लिए मोहाली के नाबी में प्लांट लगाया गया है। इस पायलट प्रोजेक्ट को भारत व स्वीडन आपसी सहयोग से शुरू करने जा रहे हैं। नाबी के कार्यकारी निदेशक टीआर शर्मा ने यहां बताया कि फसलों के अपशिष्ट को बायोकोल बनाने के लिए रॉ मैटिरियल के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा।
एनजीटी सहित सुप्रीम कोर्ट भी पंजाब के बढ़ते प्रदूषण को लेकर समय-समय पर चिंता जाहिर करता रहा है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण को लेकर पंजाब को फटकार भी लगाई थी। इसी बीच केंद्र सरकार ने स्वीडन के साथ मिलकर एक प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया। इसका जिम्मा मोहाली के नाबी को दिया गया। नाबी और स्वीडन के सहयोग से इस पायलेट प्रोजेक्ट को मोहाली में शुरू किया गया है।