फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बदलता नजरिया: पराली से पैदा हो रही मशरूम, पंजाब में 9,000 टन उत्पादन, आमदनी का बन रही बेहतर विकल्प

Thu, 13 Oct 2022 04:49 PM IST
ajay kumar शशिभूषण पुरोहित, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

हरियाणा के सोनीपत जिले के गांव अटेरा के किसान राहुल चौहान पराली मशरूम के उत्पादन में किसानों के प्रेरणास्रोत के रूप में उभरे हैं। राहुल ने पराली की प्रबंधन कर इसे मशरूम उत्पादन में लगाया और अब लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं।
विज्ञापन
पराली में हो रही मशरूम की खेती। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की बड़ी वजह बन चुकी पंजाब में जलाई जाने वाली धान की पराली के प्रबंधन के लिए मशरूम अनुसंधान निदेशालय सोलन की अनूठी पहल किसानों के लिए एक बड़े विकल्प के रूप में सामने आई है। हिमाचल के सोलन स्थित मशरूम रिसर्च डायरेक्टोरेट ने मशरूम की ऐसी किस्म इजाद की है, जो केवल पराली की कंपोस्ट में ही पैदा होती है। पोषक तत्वों से भरपूर इस पैडी स्ट्रॉ मशरूम की पंजाब में बाकायदा खेती शुरू हो गई है।

विज्ञापन


फिलहाल पंजाब में पराली मशरूम का प्रतिवर्ष 9,000 टन उत्पादन हो रहा है। माना जा रहा है कि सरकार इसके लिए सूबे में आधारभूत ढांचा तैयार करती है तो पंजाब में 40 लाख टन पराली मशरूम उगाई जा सकती है, जिससे न केवल पराली का प्रबंधन होगा, बल्कि किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी। मशरूम अनुसंधान निदेशालय सोलन के निदेशक डॉ. वीपी शर्मा ने बताया कि पंजाब में इसे प्रयोग के तौर पर किसानों ने शुरू किया है। फिलहाल 9,000 टन उत्पादन हो रहा है, जो एक अच्छा संकेत है। 

उन्होंने कहा कि अगर पंजाब सरकार मशरूम उत्पादन के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करती है तो यहां पैदा होने वाली 80 लाख टन पराली से 40 लाख टन तक मशरूम उगाई जा सकती है। हरियाणा में 20,000 टन मशरूम की पैदावार हो रही है, जिसमें 10,000 टन पराली मशरूम शामिल है। निदेशालय पराली की समस्या को देखते हुए इसकी गुणवत्ता बढ़ाने पर लगातार शोध कर रहा है। देश भर में अभी तक विभिन्न किस्मों की 2.86 लाख मीट्रिक टन मशरूम की पैदावार की जा रही है। पिछले तीन वर्षों में मशरूम का उत्पादन तीन गुना बढ़ा है। दक्षिण भारत में भी पराली पर मशरूम का बहुतायत में उत्पादन किया जा रहा है।
विज्ञापन


हरियाणा के किसान राहुल बने प्रेरणास्रोत
हरियाणा के सोनीपत जिले के गांव अटेरा के किसान राहुल चौहान पराली मशरूम के उत्पादन में किसानों के प्रेरणास्रोत के रूप में उभरे हैं। राहुल ने पराली की प्रबंधन कर इसे मशरूम उत्पादन में लगाया और अब लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं। पिछले दिनों मशरूम अनुसंधान निदेशालय पहुंचे राहुल ने कहा कि जब तक किसानों को पराली की उपयोगिता नहीं समझाई जाएगी, तब तक इसे जलाने का सिलसिला थमने वाला नहीं है। निदेशक डॉ. वीपी शर्मा ने बताया कि राहुल जैसे किसान पराली से मशरूम पैदा करने के बाद इसकी खाद भी किसानों को बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं। 

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें