मुस्तफा के वकील ने अपनी दलील में कहा कि यूपीएससी द्वारा भेजे गए चार डीजीपी में से वह सबसे सीनियर हैं। उनका आरोप है कि राज्य सरकार ने सितंबर 2018 में पंजाब पुलिस एक्ट के एक अनुच्छेद में संशोधन करके, राज्य स्तर पर गठित एक कमेटी को डीजीपी पद के लिए पैनल बनाने का अधिकार दे दिया। इस संशोधन का उद्देश्य केवल इतना था कि राज्य सरकार डीजीपी की नियुक्ति पर अपना नियंत्रण रखना चाहती है।
सरकार ने तथ्यों को छिपाया
मुस्तफा ने यह भी आरोप लगाया है कि पंजाब सरकार ने यूपीएससी के सामने कुछ अधिकारियों के बारे में तथ्यों को छिपाया। मुस्तफा ने कैट से अपील की है कि दिनकर गुप्ता को डीजीपी नियुक्त किए जाने के 7 फरवरी, 2019 के आदेश को रद्द किया जाए। इसके साथ ही यूपीएससी को निर्देश जारी करें कि वह अलग नई कमेटी गठित कर तीन सबसे अधिक पात्र सीनियर अधिकारियों का एक नया पैनल बनाकर उन पर विचार करे।
मैं ज्यादा सीनियर : सिद्धार्थ
सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय ने दिनकर गुप्ता की नियुक्ति पर स्टे लगाने की मांग करते हुए याचिका में कहा कि वे नवनियुक्त डीजीपी से सीनियर हैं और मेरिट आधार पर भी उनसे आगे हैं।