बहिबल कलां गोलीकांड के मामले में मोगा के पूर्व एसएसपी चरनजीत सिंह शर्मा की गिरफ्तारी के बाद इस केस में नामजद बाकी तीन पुलिस अधिकारियों में से तत्कालीन एसपी फाजिल्का बिक्रमजीत सिंह और एसएसपी मोगा के रीडर इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह ने सोमवार को अग्रिम जमानत के लिए स्थानीय जिला व सेशन जज की अदालत में याचिकाएं दायर की है। इन याचिकाओं पर जिला अदालत ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर दिया है और मामले की सुनवाई 30 जनवरी को होगी।
बहिबल कलां गोलीकांड मामले में थाना बाजाखाना में घटना के सात दिन बाद 21 अक्तूबर 2015 को अज्ञात पुलिस पार्टी पर हत्या का केस दर्ज किया गया था। इस केस में जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पिछले साल 21 अगस्त 2018 को चार पुलिस अधिकारियों तत्कालीन एसएसपी मोगा चरणजीत सिंह शर्मा, उसके रीडर इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह, फाजिल्का के एसपी बिक्रमजीत सिंह और थाना बाजाखाना प्रभारी एसआई अमरजीत सिंह कुलार को नामजद किया था।
चार दिन पहले इन अधिकारियों की हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद एसआईटी ने इनमें से तीन को 29 जनवरी 2019 को पूछताछ के लिए चंडीगढ़ बुलाया था लेकिन उससे पहले ही चरणजीत के विदेश भागने की आशंका के चलते रविवार को एसआईटी ने उसे गिरफ्तार कर लिया। उसकी गिरफ्तारी के बाद केस में बाकी नामजद पुलिस अधिकारियों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए जिला अदालत में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की है।
बहिबल कलां गोलीकांड में मोगा के पूर्व एसएसपी चरणजीत सिंह शर्मा की गिरफ्तारी के बाद श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह को भी बेअदबी मामले की जांच में शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा जानकारी के अनुसार एसआईटी गुरमीत सिंह को भी प्रोडक्शन वारंट पर पंजाब लाकर पूछताछ कर सकती है। गुरमीत सिंह को माफी देने और बाद में संगत का दबाव पड़ने पर माफी वापस लेने के बाद श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाएं शुरू हुई थी।
बहिबल कलां में हुए गोलीकांड और बेअदबी की घटनाओं की जांच कर रही एसआईटी ज्ञानी गुरबचन सिंह से पूछताछ कर सकती है कि गुरमीत सिंह को माफी देने के लिए उन पर किसका दबाव था। एसएसपी चरणजीत शर्मा के साथ की जा रही पूछताछ में एसआईटी को जो भी जानकारी मिलेगी उसके आधार पर बेअदबी कांड के साथ जुड़े कई पुलिस व धार्मिक नेताओं के साथ साथ बड़े नेताओं पर गाज गिरने की संभावना है।