प्रवर्तन निदेशालय में जालंधर से दिल्ली तक खलबली मची हुई है और तबादलों का दौर शुरू हो चुका है। जहां मजीठिया केस की जांच करने वाले अधिकारी सहायक डायरेक्टर निरंजन सिंह का तबादला कोलकाता किया गया है वहीं नॉर्थ जोन में भी तेजतर्रार अधिकारी संजय श्रीनेत को इंचार्ज बनाया गया है। उन्हें कनरल सिंह का स्थान दिया गया है। साथ ही तीन जनवरी को आई कॉल ने भी खलबली बढ़ा दी है।
पंजाब में ईडी का आरोप था कि उनके फोन टेप किए जा रहे हैं और प्रदेश की खुफिया एजेंसियां उनकी प्रॉपर्टी का हिसाब-किताब पूछ रही हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक छह हजार के ड्रग रैकेट में केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने भी अपना पूरा जाल बिछाया हुआ है। केंद्रीय एजेंसियों ने कई फोनों को रिकॉर्डिंग पर लिया हुआ है। तीन जनवरी की एक कॉल ने केंद्रीय एजेंसियों को हिलाकर रख दिया है। तीन जनवरी की यह कॉल ईडी के वरिष्ठ अधिकारी और सत्ताधारी पार्टी के एक कद्दावर नेता के बीच हुई है।
केंद्रीय एजेंसियां रख रही ईडी के अधिकारियों पर नजर
इसके बाद केंद्रीय एजेंसियों ने पूरी रिपोर्ट मुख्यालय को बनाकर दी। तीन जनवरी की इस कॉल ने बड़ा बम फोड़ दिया है यही कारण है कि आने वाले दिनों में कई तबादले ईडी में और देखने को मिल सकते हैं।
ईडी के सूत्रों की माने तो ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी की पंजाब के एक आईपीएस अधिकारी के साथ गहरी दोस्ती है और यह दोस्ती पार्टनरशिप में भी तब्दील हो चुकी है।
इस पार्टनरशिप की केंद्रीय एजेंसियों को पूरी जानकारी मिल चुकी है। ईडी के कई अधिकारी पंजाब पुलिस अधिकारियों के साथ जो दोस्ती निभा रहे हैं उसका खमियाजा उनको आने वाले दिनों में भुगतना पड़ सकता है।
निरंजन सिंह का जालंधर में दस साल का कार्यकाल
सहायक डायरेक्टर निरंजन सिंह का कार्यकाल जालंधर में दस साल रहा है। निरंजन सिंह का तबादला लंबे समय से लंबित था और उनको संवेदनशील ड्रग केस में जांच के लिए पंजाब रोका गया था।
निरंजन सिंह ने अपने कार्यकाल में रहते हुए कई केसों की जांच की जिसमें हैप्पी फॉरेक्स मनी लॉड्रिंग केस, राजा कंदोला ड्रग तस्करी केस, पाल पाबला नवांशहर हवाला कारोबारी केस, पंजाब के नामी सिंगरों मिस पूजा, गिप्पी ग्रेवाल, जजी बी, दिलजीत दोसांझ के हवाला मनी के केस के अलावा सीपीएस अविनाश चंद्र के करीबी सीटा आढ़तिया का केस भी शामिल है।