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राम रहीम की फिल्म MSG पंजाब में बैन

Sun, 18 Jan 2015 08:26 AM IST
टीम डिजिटल
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डेरा सच्चा सौदा सिरसा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की विवादित फिल्म MSG की रिलीज पर फिल्हाल पंजाब में बैन लगा दिया है। सेंसर बोर्ड की तरफ से लगी अस्थाई रोक हटने के बाद इस फिल्म को देशभर में 18 जनवरी (रविवार) को रिलीज होना था। पंजाब सरकार ने फिल्म का बैन लगाने का फैसला प्रदेश के हालात खराब होने के मद्देनजर लिया है।
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सरकार का मानना है कि फिल्म पंजाब में रिलीज हुई तो यहां के हालात बिगड़ने का डर है। सिख समुदाय के लोग पहले से फिल्म की रिलीज का विरोध कर रहे हैं। इस संबंध में सरकार की ओर से संबंधित जिलों के अधिकारियों को अपने जिलों में शांति व्यवस्था बनाने के लिए दिशा निर्देश दिये गए है।

गौरतलब है कि अकाल तख्त ने पंजाब सरकार से फिल्म पर पाबंदी की मांग की थी। अकाल तख्त के प्रमुख गुरबचन सिंह ने कहा था कि डेरा प्रमुख पर हत्या और बलात्कार के आरोप हैं, और उनकी फिल्म से लोग गुमराह हो सकते हैं।
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ऑल इंडिया सिख स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएसएफ) के प्रमुख करनैल सिंह पीर मोहम्मद ने भी केंद्र और राज्य सरकार से फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की थी।

रिलीज की संभावना से पंजाब-हरियाणा में हाईअलर्ट

सिरसा डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की मूवी मैसेंजर ऑफ गॉड 18 जनवरी को रिलीज हो सकती है। इस संभावना को देखते हुए पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।

बता दें कि सेंसर बोर्ड ने मूवी को अनुमति देने से इंकार कर दिया था, लेकिन इसकी रिलीज को अनुमति दे दी गई। अब इस मूवी को लेकर विवाद गहरा गया है। साथ ही मूवी के मुद्दे पर सरकार और बोर्ड के बीच ठन गई है।

बोर्ड के कामकाज में ‘हस्तक्षेप’ के कारण पहले चेयरपर्सन पद से लीला सैमसन ने इस्तीफा दिया। अब बोर्ड की सदस्य इरा भास्कर ने भी इस्तीफा दे दिया है।

दूसरी ओर, फिल्म प्रदर्शन को अनुमति मिलने के खिलाफ सिख संगठनों में रोष है। उन्होंने पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किण्‍। वहीं, डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह ने कहा है कि इस फिल्म में किसी धर्म पर निशाना नहीं साधा गया है।

फिल्म प्रमाणन अपीलीय न्यायाधिकरण ने अनुमति दी

सेंसर बोर्ड के इनकार के बाद ‘फिल्म प्रमाणन अपीलीय न्यायाधिकरण’ ने फिल्म ‘मैसेंजर ऑफ गॉड’ को रिलीज करने की मंजूरी दे दी है।

इस कारण बढ़े विवाद के बीच बोर्ड की सदस्य इरा भास्कर ने भी सैमसन का समर्थन करते हुए पद से इस्तीफा दे दिया। सैमसन ने वीरवार रात को इस्तीफा दिया था।

भास्कर ने कहा कि उन्होंने मिलकर फिल्म की रिलीज रोकी थी, लेकिन चीजें ठीक तरीके से नहीं चल रही हैं। सैमसन ने बोर्ड के संचालन में मंत्रालय की सहायता की, लेकिन पिछले एक साल से बोर्ड के सदस्यों की कोई बैठक नहीं हुई।

सेंसर बोर्ड के सीईओ का कहना है कि उनके पास बैठक बुलाने के लिए पैसे नहीं है। ऐसे में स्पष्ट है कि अब बोर्ड की कोई जरूरत नहीं है।

न्याधिकरण में 24 घंटे में मंजूरी दी

बोर्ड की एक अन्य सदस्य नंदिनी सरदेसाई ने भी सैमसन और भास्कर का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि हमने पूरी तरह से सिनेमेट्रोग्राफी कानून के तहत काम किया और पाया कि इस फिल्म को सार्वजनिक करना जनहित में नहीं है। फिल्म को रोकने संबंधी फैसला हम सभी का था।

उन्होंने कहा कि न्यायाधिकरण से सुनवाई की प्रक्रिया में सामान्य तौर पर 15-30 दिन का समय लगता है, लेकिन इस फिल्म को 24 घंटे के भीतर मंजूरी मिल गई। एक न्यायाधिकरण बनाया गया और फिल्म को पास कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि यह कुछ और नहीं बल्कि सैमसन को नीचा दिखाने की कोशिश है। सैमसन ने कामकाज में सरकारी हस्तक्षेप, दबाव और पैनल के सदस्यों में भ्रष्टाचार के कारण इस्तीफा देने की बात कही है।

24 घंटे में मिली मंजूरी से उठे सवाल

सेंसर बोर्ड के इनकार के बाद 24 घंटे में विवादित फिल्म ‘मैसेंजर ऑफ गॉड’ को अपीलीय न्यायाधिकरण की मंजूरी मिल गई। सामान्य तौर पर इस प्रक्रिया में 15-30 दिन का समय लगता है। इस कारण सेंसर बोर्ड के सदस्य नाराज हैं।  

- मोदी सरकार हर छोटी-बड़ी फिल्म में हस्तक्षेप करती है। आमिर खान की पीके फिल्म में सरकार ने दखल किया था। - लीला सैमसन,

- सैमसन के आरोप गंभीर हैं और सरकार के कामकाज के अंदाज की पोल खोलते है। सेंसर बोर्ड के कामकाज में दखलअंदाजी करने वाले लोगों के खिलाफ सरकार कार्रवाई करे। - अभिषेक मनु सिंघवी, कांग्रेस प्रवक्ता

- मैंने पहले ही कहा है कि मैं केवल एक इंसान हूं। फिल्म में दिखाई गई चीजें स्टंट हैं। इसमें किसी धर्म पर निशाना नहीं साधा गया है। 18 जनवरी को फिल्म रिलीज करने के बारे में विचार जारी है। -गुरमीत राम रहीम सिंह, डेरा सच्चा सौदा प्रमुख

हस्तक्षेप के सबूत दें सैमसन

सूचना प्रसारण राज्य मंत्री राज्यवर्द्धन सिंह राठौर ने कहा है कि सरकार ने हमेशा से फिल्मों के प्रमाणीकरण से खुद को दूर रखा है। इन आरोपों के संदर्भ में सैमसन को सबूत देना चाहिए। ‘मैसेंजर ऑफ गॉड’ को मंजूरी देने में सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया।  

दिल्ली से चंडीगढ़ तक सिखों का प्रदर्शन
विवादित फिल्म ‘मैसेंजर ऑफ गॉड’ को रिलीज करने की अनुमति मिलने से नाराज सिख संगठनों ने दिल्ली से लेकर चंडीगढ़ तक विरोध प्रदर्शन किए हैं।

दिल्ली में शिरोमणि अकाली दल के प्रदर्शनकारियों ने भाजपा मुख्यालय तक मार्च कर सेंसर बोर्ड की अध्यक्ष के इस्तीफे और फिल्म को अपीलीय न्यायाधिकरण से मंजूरी की जांच करवाने की मांग की।

इसी तरह हरियाणा के अंबाला, हिसार और सिरसा में भी प्रदर्शन हुए। पंजाब के बठिंडा, मुक्तसर, मनसा, फिरोजपुर, फरीदकोट और मोगा जिले में डेरा सच्चा सौदा पंथ के मानने वालों की अच्छी-खासी संख्या को देखते हुए वहां पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

पंजाब पुलिस ने किया खुलासा

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ। वे बब्बर खालसा की हिट लिस्ट में टॉप पर थे।

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की फिल्म ‘एमएसजी’ पर जारी विवाद के बीच पंजाब पुलिस ने 2007 के शिंगार सिनेमा (लुधियाना) बम धमाके के मद्देनजर चौकसी बढ़ा दी है।

अक्तूबर 2007 में हुए इस धमाके में छह लोगों की मौत हुई थी तथा कई घायल हुए थे। जांच के बाद पुलिस का कहना था कि धमाके को अंजाम देने वाले बब्बर खालसा इंटरनेशनल से संबद्ध थे तथा डेरा प्रमुख उनकी हिट लिस्ट पर थे।

हालांकि, बाद में इस केस में गिरफ्तार किए गए सभी आरोपी बरी हो गए, लेकिन मौजूदा स्थिति में पंजाब पुलिस कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहती।
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शिंगार कांड के मद्देनजर बढ़ाई प्रदेश की चौकसी

शिंगार कांड जैसे हाहाकार का सामना फिर से न करना पड़े, इसके मद्देनजर पुलिस ने सभी जिला पुलिस प्रमुखों को चौकसी बढ़ाने के निर्देश जारी कर दिए हैं।

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि डेरा प्रमुख एक समय बब्बर खालसा इंटरनेशनल के निशाने पर थे, ऐसे में किसी अनहोनी की आशंका को दरकिनार नहीं किया जा सकता। इस फिल्म को लेकर पहले ही विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। पंजाब में कई सिनेमाघर मालिकों ने इसे प्रदर्शित करने से इनकार कर दिया है।

खुफिया एजेंसियां पहले ही सतर्क कर चुकी है कि फिल्म के रिलीज होने पर विरोध के चलते पंजाब में हालात खराब हो सकते हैं। इसलिए पुलिस प्रशासन कोई भी जोखिम नहीं उठाना चाहता। सभी जिला पुलिस प्रमुखों को निर्देश जारी करने के साथ ही चंडीगढ़ स्थित पंजाब पुलिस मुख्यालय से पूरे प्रदेश के हालात पर पैनी नजर रखी जा रही है।
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