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मिल्खा ने अपना सपना किया युवाओं के हवाले

Thu, 14 Nov 2013 12:14 PM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
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हाथ की लकीरों से जिंदगी नहीं बनती....अजम हमारा भी कुछ हिस्सा है जिंदगी बनाने में। इस शेर का फलसफा है कि मेहनत करो और जीत लो जिंदगी की जंग.....यह है चंडीगढ़ के युवाओं को पद्मश्री मिल्खा सिंह का संदेश। मिल्खा सिंह चंडीगढ़ बुक फेयर में अपनी किताब रेस आफ मिल्खा पर बुक टाक के दौरान मौजूद थे। 
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पद्मश्री मिल्खा सिंह ने कहा कि जो गोल्ड मेडल रोम ओलंपिक में उनसे गिर गया वह चाहते हैं कि इंडियंस आगे बढ़ें और जीत लें। ऐसा हार्ड वर्क के माध्यम से ही हो सकेगा।

उन्होंने कहा कि दुख इस बात का है कि अब स्कूल हैं, रनिंग ट्रैक हैं, सुविधाएं हैं, हजारों कोच हैं पर मेडल नहीं हैं। कमी कहां है यह तलाशना होगा। एसोसिएशन भी कुछ नहीं करती हैं।
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उन्होंने कहा कि करना वही होगा जो चीन ने किया....एथलेटिक दुनिया का नंबर वन गेम है और हमको इसमें बाजी मारनी होगी। उन्होंने कहा कि इंडिया में पीटी ऊषा, सचिन तेंदुलकर, मिल्खा सिंह जैसे स्टार हुए तो क्या यह देश एक गोल्ड मेडल विजेता एथलीट नहीं देगा।

मैं मिल्खा सिंह को देखने आईं हूं
चंडीगढ़ साहित्य अकादमी की चेयरपर्सन मंजू जैदका ने आडियंस से बातचीत का सिलसिला शुरू किया तो कुछ ने कहा कि वह मिल्खा को देखने आई हैं तो किसी ने कहा कि वह उनका आटोग्राफ लेना चाहते हैं।

नौ साल की गुरवीन से उन्होंने पूछा तो गुरवीन ने कहा कि वह मिल्खा सिंह की फैन हैं और भाग मिल्खा भाग देखने के बाद वह उनसे मिलने को बेताब थीं। यहां पंजाब यूनिवर्सिटी, जीसीजी-11 और अन्य कालेजों के स्टूडेंट्स यहां मौजूद रहे।

यहां मौजूद स्टेट इंस्टीट्यूट आफ एजूकेशन की प्रीती, मनसा, खुशबू और प्रियंका ने कहा कि मिल्खा सिंह जैसा कोई दूसरा नहीं हो सकता है। इस मौके पर यहां पहुंची रमनप्रीत कौर ने कहा कि मिल्खा सिंह सिटी का ही नहीं देश का गौरव हैं और उनसे मिलने की इच्छा काफी समय से थी।

ट्रस्ट मेरा है पर फायदा सबका
पद्मश्री मिल्खा सिंह ने कहा कि उन्होंने एक ट्रस्ट बनाया है। यह ट्रस्ट सीधे उनकी फिल्म से जुड़ा है। जब फिल्म बनाने की बात आई तो कई डायरेक्टर आए पर उन्होंने बेटे के कहने पर एक रुपये में अपनी कहानी राकेश ओमप्रकाश मेहरा को दे दी। लेकिन उसके साथ एक एग्रीमेंट भी किया कि फिल्म की जो कमाई होगी उसका दस फीसदी हिस्सा ट्रस्ट को देंगे।
स्पोर्ट्समैन स्पिरिट तो बोलती है

मैं अपने बेटे को खिलाड़ी नहीं बनाना चाहता था। लेकिन बेटा गोल्फ खेलने लगा। मिल्खा सिंह ने कहा कि बच्चों को बनाने में जितनी मेहनत बच्चा करता है उससे कहीं ज्यादा मेहनत माता पिता करते हैं।

कार्ल लुईस ने भेजा एक तोहफा
पद्मश्री मिल्खा सिंह ने कहा कि इंटरनेशनल धावक कार्ल लुइस ने जब उनकी फिल्म भाग मिल्खा भाग देखी तो उनको रोना आ गया। कार्ल लुइस ने मेरा फोन नंबर लिया और उसके बाद मेरा पता लेकर एक छोटा सा गिफ्ट भेजा।

बच्ची को रोका
एक छोटी सी बच्ची मिल्खा सिंह से उनका आटोग्राफ लेने के लिए चढ़ आई। उसको आयोजकों ने मना किया तो मिल्खा ने रोक दिया और आटोग्राफ देकर बच्ची को नीचे भेजा।
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