शिअद ने किसान संगठनों के सामने अपना पक्ष रखा और कहा कि रैलियों के जरिए ही नेता जनता के बीच पहुंच पाते हैं, यदि वह रैलियां ही नहीं करेंगे तो जनता के बीच कैसे पहुंच पाएंगे। शिअद की ओर से विकल्प रखा गया कि किसान रैलियां जारी रखें, जब भी किसानों का कार्यक्रम होगा शिअद अपने सभी कार्यक्रमों को रद्द कर देगा। शिअद की ओर से प्रो. चंदूमाजरा और डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने बैठक में हिस्सा लिया।
सिद्धू बोले- कांग्रेस किसानों के साथ
किसानों की इस कचहरी में पार्टी प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू, संगठन महासचिव परगट सिंह और कार्यकारी प्रधान कुलजीत नागरा के साथ पहुंचे। जहां उन्होंने हाल ही में हुई लाठीचार्ज की घटनाओं पर प्रति खेद प्रकट किया। उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि कांग्रेस उनके साथ है और उनकी मांगों को वह आगे तक ले जाएंगे।
सत्ता में आते ही कृषि कानूनों के खिलाफ लाएंगे प्रस्ताव: आप
आम आदमी पार्टी की ओर से किसान विंग के प्रदेश अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां, विधायक अमन अरोड़ा और बलजिंदर कौर शामिल हुए। आप नेताओं ने किसान संगठनों को आश्वस्त किया कि उनकी पार्टी हमेशा से किसानों के साथ है और भविष्य में भी साथ रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकार सत्ता में आते ही पंजाब में तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव लाएगी।
क्यों लगानी पड़ी किसान कचहरी
किसान नेताओं के अनुसार मजबूरी में किसान कचहरी का आयोजन करना पड़ा। 32 किसान संगठनों के नेताओं का कहना है कि शिअद की चुनावी 'गल पंजाब' मुहिम के कारण किसान आंदोलन बर्बाद हो रहा है। गांवों में सियासत के कारण भाईचारे पर असर पड़ रहा है। पंजाब में एक बार फिर से आंदोलन को राज्य में मजबूत आधार देने के लिए चुनाव की घोषणा तक इन रैलियों पर तत्काल प्रभाव से अंकुश लगाना अनिवार्य है।