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किसके सर होगा श्ाहर के मेयर का ताज

Tue, 19 Nov 2013 09:08 AM IST
राजेश ढल्ल/ अमर उजाला, चंडीगढ़
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वर्तमान महापौर सुभाष चावला का कार्यकाल 42 दिन बाद खत्म हो रहा है। नए मेयर के चुनाव के लिए राजनीतिक दलों में अभी से लाबिंग शुरू कर दी है।
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इस बार मेयर का पद इस लिए भी अहम माना जा रहा, क्योंकि अगले साल लोकसभा चुनाव भी होेना है। ऐसे में कांग्रेस और भाजपा दोनों ही मेयर पद पर कब्जा करना चाहते हैं।

हालांकि, कांग्रेस और भाजपा को अपना मेयर जिताने के लिए पसीना बहाना पडे़गा। बता दें कि पिछले 12 साल से नगर निगम में कांग्रेस का कब्जा है, लेकिन कांग्रेस पाषर्दों में गुटबाजी के चलते इस बार अपना मेयर जिताने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पडे़गी।
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गौरतलब है कि मेयर का कार्यकाल एक साल का होता है। इस बार मेयर का पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है।

किस तरह से होता है मेयर का चुनाव
निर्वाचित पार्षद को ही मेयर का चुनाव लड़ने का अधिकार है। मेयर पद के लिए 26 दिसंबर से नामाकंन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

मेयर चुनने के लिए सभी 36 पार्षद मतदान करते हैं। इसी तरह से सीनियर और डिप्टी मेयर चुना जाता है। मेयर का चुनाव जीतने के लिए कम से कम 19 वोटों की जरूरत है।

मेयर का कार्यकाल एक साल के लिए होता है। पार्षद प्रत्यक्ष रूप से मतदान करते है।


बसपा, निर्दलीय और चंद मनोनीत नाराज
पिछले दो बार से कांग्रेस पार्टी मेयर पद पर कब्जा मनोनीत, बसपा और निर्दलीय पार्षदों के दम पर करती आ रह है, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं।

बसपा के दो और निर्दलीय एक पार्षद के अलावा चंद मनोनीत पार्षद कांग्रेस से नाराज चल रहे हैं। मेयर के चुनाव में 9 मनोनीत पार्षदों का काफी अहम रोल होगा।

यहां तक कि राजनीतिक दल मेयर पद का उम्मीदवार तय करने से पहले भी इनकी राय ले रही है। बसपा ने पिछली बार कांग्रेस को समर्थन दिया था, लेकिन इस बार बसपा और कांग्रेस में छत्तीस का आंकड़ा है।

बसपा की पार्षद जन्नत जहां उल हक लोकसभा चुनाव की उम्मीदवार घोषित हो चुकी हैं। निर्दलीय पार्षद गुरचरण दास काला का कहना है कि उन्होंने पिछले चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार को समर्थन किया था, लेकिन वह कांग्रेस की कारगुजारी से खुश नहीं हैं।

ऐसे में वह इस बार चुनाव में कांग्रेस को समर्थन नहीं करने जा रहे है, जबकि मनोनीत पार्षद डीएस संधू का कहना है कि उम्मीदवार की काबलियत देखकर मतदान किया जाएगा।

कौन कौन है उम्मीदवार
अगले साल मेयर का पद अनुसूचित जाति के पार्षद के लिए आरक्षित है। भाजपा-अकाली गठबंधन में सिर्फ एक मात्र पार्षद राजेंद्र कौर रत्तू ही उम्मीदवार है, जबकि कांग्रेस में मेयर पद के तीन दावेदार हैं।

इसमें डिप्टी मेयर सतीश कैंथ, हरफूल चंद कल्याण और शीला फूल सिंह का नाम शामिल है। लेकिन, पार्टी के पार्षद और नेता मुख्य रूप से सतीश कैंथ और हरफूल चंद कल्याण के लिए लाबिंग कर रहे हैं।

दोनों ही नेता शहर के सांसद पवन बंसल के करीबी और सीनियर नेता हैं। कल्याण और शीला फूल सिंह लगातार दूसरी बार पार्षद बनीं हैं, जबकि डिप्टी मेयर सतीश कैंथ पहली बार पार्षद बने।

पिछले नगर निगम चुनाव में भी उन्हें रामदरबार से टिकट मिली थी, लेकिन वह 100 वोट से हार गए थे। सतीश कैंथ लगातार दूसरे साल डिप्टी मेयर के पद पर विराजमान है।

किस पार्टी के कितने पार्षद
पार्टी--------वोट
कांग्रेस-------12
भाजपा-------9
अकाली-------2
बसपा---------2
निर्दलीय-------1
मनोनीत-------9
सांसद---------1
कुल----------36

कांग्रेस अध्यक्ष बीबी बहल के मुताबिक हर बार की तरह मेयर सहित सीनियर और डिप्टी मेयर पर पार्टी का उम्मीदवार जीतेगा और अगले साल लोकसभा चुनाव भी पार्टी ही परचम लहराएगी। मेयर पद का उम्मीदवार तय करने के लिए सभी पार्षदों की राय ली जाएगी।
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वहीं भाजपा पार्षद दल के नेता अरुण सूद ने दावा किया कि कांग्रेस पार्टी के पार्षदों में गुटबाजी है इसके साथ ही कई मनोनीत पार्षदों का भी उनके उम्मीदवार को समर्थन मिलेगा। भाजपा-अकाली गठबंधन ही अगले मेयर का चुनाव जीतने जा रहा है।
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