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चिंता की बात: जम्मू के रियासी जिले में बढ़ रहे इंजियोइडिमा के मरीज, दुनिया में काफी दुर्लभ है ये मर्ज

Mon, 12 Dec 2022 09:00 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

रेयर और जानलेवा माने जाने वाली इस बीमारी को लेकर लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। डॉ. अंकुर ने बताया कि इसके लिए इंजियोइडिमा सोसाइटी की स्थापना 2021 में हुई थी। उसका मुख्य उद्देश्य इस रेयर बीमारी से लोगों को अवगत कराना है।
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इंजियोइडिमा - फोटो : प्रतीकात्मक
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विस्तार
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दुनिया में रेयर मर्ज माने जाने वाले इंजियोइडिमा के मरीजों की संख्या जम्मू कश्मीर के रियासी जिले में तेजी से बढ़ रही है। इस मर्ज के लिए देश का रेफरल सेंटर बनाए गए पीजीआई के इम्यूनोडिफिशिएंसी क्लीनिक के डॉक्टरों ने मरीजों की बढ़ती संख्या का पता लगाने के लिए जिले में सर्वे भी किया है। इसमें बीमारी बढ़ने के कारणों की तो जानकारी नहीं मिल पाई है लेकिन काफी संख्या में इसके मरीज मिले हैं। इसे लेकर शोध करने की तैयारी की जा रही है जिससे इस गंभीर बीमारी को रोकने के उपाय तलाशे जा सके।

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पीजीआई के इम्यूनोडिफिशिएंसी क्लीनिक के डॉ. अंकुर अवस्थी ने बताया कि माता-पिता से बच्चे में होने वाली इस गंभीर बीमारी से बचाव के लिए अब तक कोई इलाज उपलब्ध नहीं है। देश के अलग अलग हिस्सों में इसके 500 मरीज चिह्नित किए गए हैं, लेकिन कुछ समय पहले अचानक जम्मू-कश्मीर के इस इलाके में लगातार मरीज सामने आने लगे। उन मरीजों से पूछने पर पता चला कि रियासी गांव में ऐसे लोगों की काफी संख्या है जो इस मर्ज से ग्रस्त है। पीजीआई की टीम ने गांव में जाकर सर्वे किया और लक्षणों के आधार पर गांव के अलग अलग परिवारों के 25 लोगों के जांच के नमूने लिए गए। उनमें से 20 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इससे यह बात सामने आ रही है कि उस पर क्षेत्र में इस बीमारी के होने का खतरा ज्यादा है। इसलिए उसे लेकर शोध के माध्यम से निष्कर्ष पर पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।
 
खुजली और सूजन ले सकती है जान
इस मर्ज में शरीर में खुजली के साथ ही सूजन सामान्य तौर पर नजर आती है। आमतौर पर लोग इसे एलर्जी मान का नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन यह धीरे धीरे गंभीर रूप धारण कर लेती है। डॉ. अंकुर अवस्थी ने बताया कि शरीर के अलग अलग हिस्सों में होने वाले सूजन को कम करने के लिए पहले सिर्फ दवाइयां ही उपलब्ध थीं, लेकिन अब इसके लिए इंजेक्शन भी मार्केट में आ चुका है। डॉ. अंकुर का कहना है कि गले में होने वाले सूजन से मरीज की मौत भी हो सकती है क्योंकि उससे सांस की नली अवरुद्ध हो जाती है और अचानक मरीज की सांस बंद हो जाती है।
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लोगों को जागरूक करने का हो रहा प्रयास
रेयर और जानलेवा माने जाने वाली इस बीमारी को लेकर लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। डॉ. अंकुर ने बताया कि इसके लिए इंजियोइडिमा सोसाइटी की स्थापना 2021 में हुई थी। उसका मुख्य उद्देश्य इस रेयर बीमारी से लोगों को अवगत कराना है। इस सोसाइटी में त्वचा रोग और बाल रोग विशेषज्ञ शामिल है। यह मर्ज शरीर में पाए जाने वाले विशेष प्रकार के प्रोटीन की कमी के कारण होती है। अनुमानत भारत में इसके मरीजों की संख्या 30 हजार से ज्यादा होनी चाहिए लेकिन जागरूकता के अभाव में महज 500 मरीज ही चिह्नित किए जा सके हैं। यह जन्मजात मर्ज है, जिसका लक्षण आने में पांच से छह साल का समय भी लग जाता है।

बीमारी है तो गर्भावस्था में रहे सचेत
डॉ. अंकुर ने बताया कि इस बीमारी से ग्रस्त महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान विशेष रूप से सचेत रहने की जरूरत है, क्योंकि मां से बच्चे में इसके संक्रमण होने का खतरा 50-50 का होता है। ऐसे में जरूरी है कि गर्भावस्था के शुरुआती चरण में ही इसकी जांच करा ली जाए जिससे संक्रमण होने पर नियम के अनुसार गर्भपात कराया जा सके। डॉ. अंकुर का कहना है कि गर्भधारण करने के दौरान मां से बच्चे में संक्रमण ट्रांसफर हुआ है कि नहीं इसकी जांच गर्भावस्था के समय गर्भ में पल रहे बच्चे की जीन की जांच कर की जाती है।

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