तभी सोमवार दोपहर को मनदीप के शहीद होने की खबर ने उनको झकझोर कर रख दिया। उन्होंने सरकार से मांग की है कि सरकार शहीद के परिवार को ज्यादा से ज्यादा सहायता प्रदान करे और शहीद की विधवा पत्नी और उसके बच्चों के बारे में सोचे। वहीं बड़े भाई जगरूप सिंह ने भी मनदीप सिंह को हंसमुख स्वभाव का धनी बताया।
उन्होंने कहा कि वह उनके साथ एक बड़े भाई जैसा ही नहीं, बल्कि एक दोस्त जैसा व्यवहार करता था। जगरूप सिंह ने बताया कि भाई मनदीप सिंह सैनिक के साथ-साथ फुटबाल का बढ़िया खिलाड़ी था। मनदीप सिंह की शहादत की खबर के बाद से ही घर में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
शहीद के घर ग्रामीण और रिश्तेदार लगातार सांत्वना देने पहुंच रहे हैं। शहीद की पत्नी मनदीप कौर और मां मनजीत कौर कभी रोतीं-बिलखतीं हैं और फिर बेसुध हो जाती हैं। शहीद मनदीप के दोनों बेटे घर में रोते-बिलखते लोगों को देख सहमे हैं। वहीं गांव के लोग और रिश्तेदार शहीद मनदीप की मां और पत्नी को हौसला दे रहे हैं।
बुधवार को होगा शहीद मनदीप सिंह का अंतिम संस्कार
मंगलवार को गुरदासपुर के डिप्टी कमिश्नर मोहम्मद इश्फाक भी पारिवारिक सदस्यों से दुख व्यक्त करने शहीद के गांव पहुंचे। डीसी ने बताया कि सरकार की तरफ से जो भी सरकारी सुविधाएं बनती हैं, वे परिवार को दी जाएंगी। डीसी ने आगे कहा कि परिवार के लिए पैसा अथवा सरकारी नौकरी मनदीप सिंह की कमी को पूरा नहीं कर सकती।
उन्होंने बताया कि मंगलवार को आर्मी की एक टुकड़ी शहीद मनदीप का पार्थिव शरीर लेकर राजौरी से चल पड़ी हैं। मंगलवार रात वह जम्मू पहुंचेंगे और बुधवार को शहीद का पार्थिव शरीर पैतृक गांव चट्ठा पहुंचेगा, जहां सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।