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चंडीगढ़ में डेंगू ने पकड़ी रफ्तार: बढ़ी प्लेटलेट्स की मांग, निगेटिव ग्रुप के डोनर ढूंढे नहीं मिल रहे

Wed, 13 Oct 2021 10:29 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

एक यूनिट आरडीपी चढ़ाने पर सिर्फ पांच हजार प्लेटलेट्स काउंट बढ़ते हैं। इस वजह से कई यूनिट प्लेटलेट्स चढ़ाने पड़ते हैं। इसलिए रिएक्शन का डर रहता है। एक आदमी 15 दिन बाद दोबार प्लेटलेट्स दान कर सकता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock
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विस्तार
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डेंगू के मरीजों की तेजी से बढ़ती संख्या के चलते ब्लड बैंकों में प्लेटलेट्स की मांग अचानक बढ़ गई है। स्थिति यह है कि निगेटिव ब्लड ग्रुप के डोनर की तलाश में मरीजों के परिजन यहां से वहां चक्कर काट रहे हैं। इससे ब्लड बैंक के साथ ही रक्तदान शिविर आयोजित करने वाली संस्थाएं भी काफी चिंतित हैं। उनका कहना है कि मौजूदा समय में प्लेटलेट्स डोनेट करने को लेकर जागरूकता की जरूरत है, क्योंकि स्थिति दिनप्रतिदिन बिगड़ती जा रही है।

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पीजीआई ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन के प्रमुख प्रो. रतिराम शर्मा ने बताया कि सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (एसडीपी) विधि से एक बार में एक रक्तदाता के ब्लड से प्लेटलेट्स निकाल सकते हैं। इस विधि से प्राप्त होने वाली प्लेटलेट्स को सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (एसडीपी) कहा जाता है। एक यूनिट एसडीपी मरीज को चढ़ाने पर उसमें प्लेटलेट्स काउंट की मात्रा 50-60 हजार तक बढ़ जाती है।

वहीं खून निकालने के बाद रैंडम डोनर प्लेटलेट्स (आरडीपी) विधि में सेपरेटर यूनिट में प्लेटलेट्स निकाला जाता है। इसमें कम से कम छह घंटे लगते हैं। एक बार रक्तदान करने के बाद तीन माह बाद दे सकता है। एक यूनिट आरडीपी चढ़ाने पर सिर्फ पांच हजार प्लेटलेट्स काउंट बढ़ते हैं। इस वजह से कई यूनिट प्लेटलेट्स चढ़ाने पड़ते हैं। इसलिए रिएक्शन का डर रहता है। एक आदमी 15 दिन बाद दोबार प्लेटलेट्स दान कर सकता है।

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हमने है ठानी, नहीं मिटने देंगे कोई जिंदगानी

मैं अब तक 55 बार प्लेटलेट्स दान कर चुका हूं। मेरे पास जब कभी इसके लिए कॉल आता है तुरंत मदद के लिए पहुंच जाता हूं। महीने में दो बार प्लेटलेट्स देने के लिए तैयार रहता हूं। जिंदगी बचाने के लिए दिए गए योगदान से आत्मविश्वास मजबूत होता है। -अंशुल, नयागांव

युवा आगे आए, जिंदगी बचाने में सहयोग करें
मौजूदा समय में स्थिति बहुत खराब है। मेरी संस्था में प्रतिदिन 30 से 35 लोगों की प्लेटलेट्स के लिए डिमांड आ रही है। हम जैसे युवा अगर अभी आगे नहीं आए तो शर्मनाक होगा। इसलिए प्लेटलेट्स देने से कोई परेशानी होने का डर मन से निकालकर किसी की जान बचाने में सहयोग कीजिए। -शुभम, बरवाला

प्लेटलेट्स देने से नहीं होती है परेशानी
मैंने अब तक 114 बार प्लेटलेट्स दान किया है। इसमें से 90 बार दो यूनिट दान किया है, लेकिन मुझे आज तक कोई परेशानी नहीं हुई। मेरा मानना है कि जब मौका मिले, तब आगे आकर दूसरों की जान बचाने में योगदान देना चाहिए। इस राह पर चलते हुए मैंने अपना बोन मैरो तक दान कर दिया है। -राजन रेखी, सेक्टर 29

रक्तदान करने से अजनबी से जुड़ता है खून का रिश्ता
मेरी उम्र 28 साल है। मैं 41 बार प्लेटलेट्स दे चुका हूं। 18 साल पूरा होने पर मैंने पहली बार रक्तदान किया था। तब से यह क्रम जारी है। रक्तदान करजो खुशी मिलती है, वे खुशी किसी दया दान से नहीं मिलती, क्योंकि इससे अजनबी के साथ खून का रिश्ता जुड़ता है। -अजय सिंह, सेक्टर 28
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