रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को राजनीतिक सोच से ऊपर रखना होगा। रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता ठीक है, मगर यह भी देखना होगा कि क्या वर्तमान परिदृश्य में हम इतने सामर्थ्यवान हैं कि स्वदेशी के दम पर रक्षा इको सिस्टम को और मजबूती दे सकें। इसको लेकर मिलिट्री लिटरेचर फेस्ट में रक्षा मामलों के जानकार राहुल बेदी, एमवी कोटवाल, विष्णु सोम, ब्रिगेडियर सुरेश गंगाधरन, सांसद राजीव चंद्रशेखर व हरपाल सिंह शामिल रहे।
राहुल बेदी ने कहा कि रक्षा निर्माण में नीतियों और एजेंसियों की बहुलता से खिचड़ी बनती है और स्वदेशीकरण प्रक्रिया में बहुत भ्रम पैदा होता है। एक सिद्धांत के रूप में आत्मनिर्भरता प्रयास उत्कृष्ट है। एमवी कोटवाल ने कहा कि रक्षा मामले में हर एक तकनीक स्वदेश में ही बनाने में कोई बुद्धिमानी नहीं है लेकिन देश को विकसित होने के लिए जो रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, उसे प्राथमिकता देनी चाहिए और अपने विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।
राजनीतिक सोच से ऊपर उठकर प्रमुख क्षेत्रों में निवेश करने की दीर्घकालिक रणनीति बनानी चाहिए। ब्रिगेडियर सुरेश गंगाधरन ने रक्षा उपकरणों के मानकीकरण और मापनीयता की वकालत की। उन्होंने सेना, आरएंडडी, शिक्षा और उद्योग के सहज एकीकरण की बात भी की। हरपाल सिंह ने राष्ट्रीय सुरक्षा के नागरिक पहलू को सामने रखा। उन्होंने चिंता जताई कि क्या हमारा रक्षा इको-सिस्टम देश को बचाने के लिए स्वतंत्र रूप से हथियार विकसित करने में समर्थ है या हम अब भी अपनी रक्षा के लिए दूसरों पर निर्भर हैं।