1. केस हल होने तक अपराध वाली साइट के करीब ठहरना होगा : ताजा दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि विशेष रिपोर्ट (एसआर) किए मामलों खासकर कत्ल, बलात्कार, समाज के कमजोर वर्गों, महिलाओं और बच्चों पर अत्याचार और अन्य संवेदनशील व सनसनीखेज मामलों में एसीपी/डीएसपी सब-डिविजन और पीबीआई के अधिकारी मामलों के हल होने तक जुर्म वाली जगह के नजदीक अपना ठहराव करेंगे। वह जांच की प्रक्रिया के दौरान एसएचओ को केस फाइल में दिए स्पष्ट निगरानी नोटों द्वारा निर्देशित भी करेंगे।
2. सीधे भरती सब इंस्पेक्टर साल में निपटाएंगे 8 घृणित केस : जहां तक एनजीओ और हेड कांस्टेबल (एचसी) द्वारा जांच का संबंध है, डीजीपी ने मुख्यमंत्री के आदेश का पालन करते हुए निर्देश दिए हैं कि प्रत्यक्ष तौर पर भर्ती सब इंस्पेक्टर एक साल के समय के अंदर अपराध के कम से कम आठ घृणित मामलों, आईपीसी के अधीन दर्ज 10 छोटे मामलों और 10 स्थानीय और विशेष कानूनी मामलों की जांच करेंगे।
3. पदोन्नत एसआई व एएसआई करेंगे 6 मामलों की जांच: पुलिस स्टेशनों में पदोन्नति द्वारा तैनात सब इंस्पेक्टर और सहायक सब इंस्पेक्टर एक साल की मियाद में घृणित अपराधों के कम से कम 6 मामले, 10 अन्य आईपीसी मामले और 15 स्थानीय और विशेष कानूनी मामलों की जांच करेंगे। जबकि रेगुलर हेड कांस्टेबल साल में आईपीसी के अधीन दर्ज कम से कम पांच मामलों और 10 स्थानीय और विशेष कानूनी मामलों की जांच करेंगे। यह सभी अधिकारी कार्रवाई को आगे बढ़ाने और जांच से जुड़े सभी कामों जैसे छापे, तलाशी, बरामदगी, जांच, चालान तैयार करने और खत्म होते की पैरवी करना आदि के लिए जिम्मेदार होंगे।
4. निगरानी अफसर करेंगे लॉ अफसरों से तालमेल : निगरानी अधिकारी की तरफ से पैरवी करने वाले अफसरों के साथ तालमेल किया जाएगा। यह अधिकारी महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामलों में उचित तरीके से गवाहों की हाजिरी और गवाही को यकीनी बनाने के लिए पैरवी/लॉ अफसरों के साथ भी तालमेल करेंगे, ताकि जमानत रद्द करने, पुलिस रिमांड प्राप्त करने और ऐसे केसों में मुलजिम को दोषी ठहराया जाना और सजा यकीनी बनाई जा सके।
5. आला पुलिस अफसरों पर दिशा निर्देशों के पालन कराने का जिम्मा : डीजीपी ने आगे निर्देश दिए हैं कि आईजीपी/डीआईजी रेंज, सीपी और एसएसपी इन दिशा-निर्देशों की सख्ती से पालना को यकीनी बनाएंगे और एसओ और एसएचओ और डीबीओआई पंजाब में प्रत्यक्ष भर्ती किये गए एसआई की तरफ से जांच किये जा रहे घृणित केस की रिपोर्ट 5 जनवरी, 2021 तक भेजेंगे।
6. मासिक अपराध मीटिंग आईजी व डीआईजी के सुपुर्द : आईजीपी/डीआईजी रेंज मासिक अपराध मीटिंग करवाने के लिए जिम्मेदार होंगे, जबकि सीपी और एसएसपी साप्ताहिक अपराध मीटिंग करेंगे। साथ ही आईजीपी/डीआईजी रेंज, सीपी और एसएसपी ऐसी मीटिंग के दौरान मामले की जांच संबंधी निर्देशों के पालन की समीक्षा करेंगे। क्षेत्रीय दर्जाबंदी के अलावा बीओआई/साइबर क्राइम, एसटीएफ, सीआई (एसएसओसी), एनआरआई, जीआरपी समेत सभी विंगों की तरफ से भी उपरोक्त निर्देशों का पालन किया जाएगा।