गांव बुलारा के रहने वाले बलविंदर सिंह ने बताया कि उनका बेटा सिमरप्रीत सिंह पांच साल पहले यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई करने गया था। उनकी रोजाना बात हो रही है। बेटे ने बताया कि उन्हें मेट्रो स्टेशन के बेसमेंट में रखा गया है। उनके पास तीन से चार दिन का खाना-पीना है और पैसे काफी कम है। एटीएम से पैसे निकल नहीं रहे है।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार कह रही है कि बच्चे पड़ोसी देश तक पहुंच जाए। वह पहुंचे कैसे? 1200 किलोमीटर का रास्ता सड़क मार्ग से तय करना काफी मुश्किल है। ऊपर से मिसाइलें गिर रही हैं, बमबारी हो रही है। वहां पहुंचना तो दूर, निकला भी नहीं जा सकता। बेटे से बात होती है वह दिलासा देने के लिए कह देता है कि सब ठीक है, उन्हें पता है कि कुछ ठीक नहीं है।
खाने को राशन नहीं, बिस्किट खाकर गुजारा कर रही है बेटी
यूक्रेन के खारकीव में पढ़ाई करने वाली स्मीधि के पिता कमलजीत कुमार ने बताया कि चार साल पहले बेटी पढ़ाई करने गई थी। 10 दिन पहले उसका फोन आया था तो हमने बोल दिया था कि विश्वविद्यालय में बात कर वापस आ जाओ लेकिन इजाजत नहीं मिली। विद्यार्थी अब घबराएं हुए हैं। खाने के लिए उनके पास राशन नहीं है। पैसे निकल नहीं रहे हैं। बेटी और उसके साथियों के साथ जो सामान पड़ा है, वह मिल बांट कर खा रहे है। बेटी के साथ फोन पर बात हुई तो उसने बताया कि हालात काफी खराब है। बाहर निकलते है तो बम गिरने की आवाज आती है। सड़क मार्ग से जाने की इजाजत नहीं मिल पा रही है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि जल्द ही कोई हल कर बच्चों को वहां से निकाला जाए।
10 दिन पहले ही लौट आया था निखिल, अब दोस्तों की चिंता
खारकीव नेशनल यूनिर्वसिटी में पढ़ने वाले निखिल कालड़ा ने बताया कि माहौल का पहले ही पता चल चुका था। उनकी मां काफी परेशान होने लगी थी तो परिवार वालों से बात कर वह 10 दिन पहले आ गया था। दोस्तों से रोजाना बात होती है तो वह कहते है कि माहौल खराब है। वह अपने साथ पढ़ने वाले और रहने वाले दोस्तों की चिंता में है। अब यहीं दुआ है कि वह जल्द ही सही सलामत लौट आए और दोनों देशों के बीच शांति से हल निकल आए।