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यूक्रेन में फंसे भारतीय: मेट्रो स्टेशन के बेसमेंट में छात्रों ने ली शरण, नहीं मिल रहा है खाना

Mon, 28 Feb 2022 01:08 AM IST
ajay kumar विकास मल्होत्रा, संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना (पंजाब)

सार

यूक्रेन के खारकीव में पढ़ाई करने वाली स्मीधि के पिता कमलजीत कुमार ने बताया कि चार साल पहले बेटी पढ़ाई करने गई थी। 10 दिन पहले उसका फोन आया था तो हमने बोल दिया था कि विश्वविद्यालय में बात कर वापस आ जाओ लेकिन इजाजत नहीं मिली।
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यूक्रेन में बम फटने के बाद उठता धुआं। - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध ने पूरे विश्व को चिंता में डाल दिया है तो वहीं यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई करने गए भारतीय विद्यार्थियों के परिवार वालों की चिंता दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। यूक्रेन के खारकीव शहर की बात करें तो पांच हजार से ऊपर भारतीय विद्यार्थी मेडिकल की पढ़ाई के लिए वहां गए हैं। पिछले कुछ दिनों से दोनों देशों के बीच चल रहे युद्ध की वजह से विद्यार्थी पूरी तरह से डरे और सहमे हैं।

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विद्यार्थियों की हालत इस तरह की हो चुकी है कि वह मेट्रो स्टेशन के बेसमेंट में रहने के मजबूर हैं। कोई विश्वविद्यालय के बेसमेंट में है। दो से तीन दिन का जो खाना था वह खत्म हो चुका है। एटीएम से जो पैसे निकलवाए थे, वह काफी कम रह गए हैं। अब आलम यह है कि कोई राहत न मिली तो विद्यार्थी को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। 

रूस की ओर से की गई बमबारी में हवाई पट्टियां नष्ट हो चुकी हैं। फ्लाइट्स उड़ नहीं रही हैं। भारत सरकार ने यूक्रेन से आग्रह किया है कि भारतीय विद्यार्थियों को पड़ोसी देश तक छोड़ा जाए तो वह ले आएंगे। खारकीव से पोलैंड, हंगरी, रोमानिया करीब 1200 किलोमीटर दूर हैं। जहां पहुंचने के लिए भी दो दिन का समय कम से कम चाहिए। ऊपर से बमबारी के बीच वहां तक पहुंचना मुमकिन नहीं है। यूक्रेन की सरकार ने बाहर निकलने पर पाबंदी लगा रखी है। रूस की सेना यूक्रेन के कई शहरों के अंदर तक घुस चुकी है। जिसके बाद विद्यार्थियों के परिवार वालों की चिंता और भी बढ़ गई है।

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मेट्रो स्टेशन के नीचे रहने को मजबूर है विद्यार्थी

गांव बुलारा के रहने वाले बलविंदर सिंह ने बताया कि उनका बेटा सिमरप्रीत सिंह पांच साल पहले यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई करने गया था। उनकी रोजाना बात हो रही है। बेटे ने बताया कि उन्हें मेट्रो स्टेशन के बेसमेंट में रखा गया है। उनके पास तीन से चार दिन का खाना-पीना है और पैसे काफी कम है। एटीएम से पैसे निकल नहीं रहे है। 

उन्होंने कहा कि भारत सरकार कह रही है कि बच्चे पड़ोसी देश तक पहुंच जाए। वह पहुंचे कैसे? 1200 किलोमीटर का रास्ता सड़क मार्ग से तय करना काफी मुश्किल है। ऊपर से मिसाइलें गिर रही हैं, बमबारी हो रही है। वहां पहुंचना तो दूर, निकला भी नहीं जा सकता। बेटे से बात होती है वह दिलासा देने के लिए कह देता है कि सब ठीक है, उन्हें पता है कि कुछ ठीक नहीं है। 

खाने को राशन नहीं, बिस्किट खाकर गुजारा कर रही है बेटी
यूक्रेन के खारकीव में पढ़ाई करने वाली स्मीधि के पिता कमलजीत कुमार ने बताया कि चार साल पहले बेटी पढ़ाई करने गई थी। 10 दिन पहले उसका फोन आया था तो हमने बोल दिया था कि विश्वविद्यालय में बात कर वापस आ जाओ लेकिन इजाजत नहीं मिली। विद्यार्थी अब घबराएं हुए हैं। खाने के लिए उनके पास राशन नहीं है। पैसे निकल नहीं रहे हैं। बेटी और उसके साथियों के साथ जो सामान पड़ा है, वह मिल बांट कर खा रहे है। बेटी के साथ फोन पर बात हुई तो उसने बताया कि हालात काफी खराब है। बाहर निकलते है तो बम गिरने की आवाज आती है। सड़क मार्ग से जाने की इजाजत नहीं मिल पा रही है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि जल्द ही कोई हल कर बच्चों को वहां से निकाला जाए। 

10 दिन पहले ही लौट आया था निखिल, अब दोस्तों की चिंता
खारकीव नेशनल यूनिर्वसिटी में पढ़ने वाले निखिल कालड़ा ने बताया कि माहौल का पहले ही पता चल चुका था। उनकी मां काफी परेशान होने लगी थी तो परिवार वालों से बात कर वह 10 दिन पहले आ गया था। दोस्तों से रोजाना बात होती है तो वह कहते है कि माहौल खराब है। वह अपने साथ पढ़ने वाले और रहने वाले दोस्तों की चिंता में है। अब यहीं दुआ है कि वह जल्द ही सही सलामत लौट आए और दोनों देशों के बीच शांति से हल निकल आए।  
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