मोहाली के चंडीगढ़ विश्वविद्यालय में कई विदेशी विद्यार्थी हिंदी की पढ़ाई कर रहे हैं। दक्षिण अफ्रीका की रहने वाली टोवेरा टेंगेटेंगा सिस्या मोहाली स्थित चंडीगढ़ विवि में पढ़ती हैं। एक साल पहले वह यहां आई थीं और हिंदी की पढ़ाई कर रहीं हैं। टोवेरा के अलावा कई और विदेशी विद्यार्थी यहां हिंदी पढ़ रहे हैं। हिंदी अब केवल हमारी भाषा नहीं है, वह वैश्विक भाषा बन चुकी है। दुनिया भर से विदेशी विद्यार्थी भारत हिंदी पढ़ने आ रहे हैं। यही नहीं, दूसरे कई देशों में हिंदी पढ़ाई जा रही है। यह इस बात का संकेत है कि सरहद पार हिंदी की बयार है। 14 सितंबर को हिंदी दिवस है। विदेशी विद्यार्थियों ने बताया कि हिंदी के प्रति वह कैसे आकर्षित हुए और हिंदी सीखने के बाद उनका क्या लक्ष्य है।
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अब मैं हिंदी लेकर दक्षिण अफ्रीका लौटूंगी, अपने लोगों को सिखाऊंगी : टोवेरा
एक वर्ष पहले जब मैं यहां आई तब हिंदी मेरे लिए बिल्कुल नई भाषा थी। अब मैं इसे सीख रही हूं। हिंदी के साथ मेरा एक अनोखा रिश्ता बन गया है। इसे मैं अपने साथ लेकर जाऊंगी और दूसरों तक पहुंचाऊंगी। अपने देश के लोगों को वह सब सिखाऊंगी जो मैंने भारत में रहकर सीखा है। ये बातें दक्षिण अफ्रीका निवासी विद्यार्थी टोवेरा टेंगेटेंगा सिस्या ने कहीं। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में एमए न्यूट्रीशियन और डायटीशियन की पढ़ाई करने के साथ हिंदी का सर्टिफिकेट कोर्स कर रहीं टोवेरा ने हिंदी में बोलने की कोशिश करते हुए बताया कि मुझे भारत की भाषा, खान-पान और संस्कृति ने बहुत प्रभावित किया, लेकिन हिंदी न आने की वजह से यहां के लोगों से बात करने में समस्या होती थी। किसी को अपनी बात समझाने, सामान खरीदने, आने-जाने के दौरान काफी मुश्किल झेलनी पड़ती थी। कई लोगों ने इसका फायदा उठाने की भी कोशिश की, लेकिन मैंने हार नहीं मानी। इस दौरान जब यूनिवर्सिटी की ओर से सर्टिफिकेट कोर्स ऑफर किया गया तो मैंने हिंदी को चुना। स्टाफ और सहपाठियों के काफी सहयोग मिला और मैं बहुत हद तक हिंदी सीख गई हूं।
मौका मिला तो हिंदी की अध्यापक बनूंगी : मलीहा सुल्तान
बांग्लादेश की रहने वाली 22 वर्षीय मलीहा सुल्तान ने कहा कि जब मैं वर्ष 2022 में भारत आई थी तो लोगों की भाषा समझने में काफी दिक्कत होती थी। इससे वह अपने विचार-भावनाएं भी व्यक्त नहीं कर पाती थी। मैंने थोड़ी बहुत उर्दू सीखी थी, इसलिए जब मुझे यूनिवर्सिटी की ओर से किसी एक भाषा में सर्टिफिकेट कोर्स करने का मौका मिला तो मैंने हिंदी को चुना। यहां से जब मेरी हिंदी सीखने की शुरुआत हुई तो मुझे मजा आने लगा। मैं बहुत कम वक्त में ही हिंदी बोलना सीख गई। बांगलादेश में ज्यादातर बंगाली बोली जाती है। अभी मैं चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी से एयरलाइंस और एयरपोर्ट मैनेजमेंट का कोर्स कर रही हूं। एयरलाइंस के साथ तो हमेशा से मेरा जुड़ाव था, इसलिए मैंने यह कोर्स चुना। अगर मुझे मौका मिले तो मैं हिंदी की अध्यापिका बनना चाहूंगी।
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शाहरुख खान की ‘स्वदेश’ देखकर भारत आया : मानिक
सीयू में ऑप्टोमेट्री के छात्र मानिक पॉल शहर में एक अच्छी कंपनी में प्रशिक्षण ले रहे हैं। यहां वह हिंदी में लोगों से न सिर्फ अच्छे से बात कर पाते हैं, बल्कि उनकी बात समझकर उनकी समस्याओं को भी हल करते हैं। मानिक पॉल मूलतः ढाका (बांग्लादेश) के रहने वाले हैं और डेढ साल से भारत में रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि आप कोई भी भाषा सीख लो लेकिन भारत में रहकर हिंदी आनी बेहद जरूरी है। मैंने शाहरुख खान की स्वदेश समेत बहुत सी हिंदी फिल्में देखी हैं, जिन्हें देखकर भारत आने का फैसला किया। फिल्मों ने ही हिंदी सीखने के लिए प्रेरित किया। यहां आने पर देखा कि लोग हिंदी या पंजाबी भाषा का इस्तेमाल करते थे। इसके बाद दोस्तों और स्टाफ की मदद से हिंदी बोलना और समझना शुरू किया, लेकिन उसमें काफी अशुद्धियां थीं। वो हिंदी मेरे काम में कारगर साबित नहीं हो पाई। इसके बाद कुछ ऑनलाइन कोर्स भी किए, लेकिन ज्यादा मदद नहीं मिली। फिर कॉलेज से ही मैंने हिंदी का सर्टिफिकेट कोर्स किया, जिससे अब हिंदी बोल और समझ पाता हूं।
पीयू के प्रोफेसर गुरमीत हिंदी पढ़ाने के लिए दो देशों का कर चुके हैं दौरा
विदेशों में विद्यार्थी हिंदी पढ़ने के साथ ही इस भाषा में शोध भी कर रहे हैं। कई यूनिवर्सिटी में विदेशी भाषा के तौर पर हिंदी को पढ़ाया जा रहा है। वहीं स्नातक और परास्नातक में हिंदी पढ़ने के बाद कई विद्यार्थी इसी भाषा में ही शोधार्थी के तौर पर पीएचडी भी कर रहे हैं। यह कहना है पंजाब यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग के प्रो. गुरमीत सिंह का। प्रो. गुरमीत सिंह वर्ष 2021 और 2022 में क्रमश: हिंदी पढ़ाने के उद्देश्य से ताशकंद और इटली के नेपल का दौरा कर चुके हैं।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज, ताशकंद का दौरा किया। यहां बीए के तीनों वर्षों में 8 से 12 विद्यार्थी विदेशी भाषा के तौर पर हिंदी पढ़ रहे थे। यहां विद्यार्थियों को डिग्री पूरी करने के लिए कोई भी दो विदेशी भाषाएं सीखना अनिवार्य है। विद्यार्थी रशियन बोलते थे और हिंदी पढ़ते थे। छात्रों को इस दौरान हिंदी के शब्दों का सही उच्चारण करवाना मेरा मुख्य काम था, क्योंकि हिंदी मातृभाषा नहीं होने के कारण वहां के शिक्षक भी उच्चारण सही से नहीं कर पाते हैं। इसलिए छात्र और शिक्षक हर समय हिंदी में बात करते थे।
वहीं वर्ष 2022 में यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ ओरिएंटल, नेपल, इटली में भी विद्यार्थियों में हिंदी के साथ भारतीय लोगों को लेकर काफी रुझान है। यहां बीए के तीनों सालों में आठ से नौ विद्यार्थी हिंदी पढ़ रहे थे। वहीं संस्थान में दस विद्यार्थी हिंदी में पीचएडी कर रहे थे। इसके साथ ही यहां पर हिंदी में मूवी क्लब चलाते थे, जिसमें हिंदी नहीं पढ़ने वाले विद्यार्थी भी हिंदी फिल्में देखने के लिए एकजुट होते थे।