हरियाणा के पूर्व सीएम मनोहर लाल।
- फोटो : एएनआई
हरियाणा मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद मनोहर लाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि उन्होंने बहुत समय पहले ही पार्टी नेतृत्व के सामने बात रखी थी कि हरियाणा के लिए अब नया नेतृत्व तैयार करना चाहिए। पार्टी ने मेरी बात स्वीकार कर ली थी और उसी दिशा में यह परिवर्तन किया गया है। पार्टी की नीति रही है कि नए लोगों को नई जिम्मेदारी दी जाए। इसी के तहत मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी नए चेहरों को मौका दिया गया है। हालांकि वहां पर चुनाव के बाद नई जिम्मेदारी दी गई थी।
हरियाणा में चुनाव से पहले ही परिवर्तन कर दिया गया। पीएम की तारीफ करने और उसके अगले ही दिन इस्तीफे के सवाल पर उन्होंने कहा कि दोनों का दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है। पीएम मोदी के मन में जब भी कोई बात आती है तो वह बोल देते हैं। मुझे भी अपनी तारीफ सुन अच्छा लगा। जजपा से गठबंधन टूटने के सवाल पर उन्होंने कहा कि भाजपा का पहले से 10 लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ने का फैसला था। इस बारे में जजपा ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के सामने अपनी मांग रखी। इस पर पार्टी ने पहले ही तय कर दिया गया था कि वह दसों सीट पर लड़ेंगे।
इसके बाद जजपा ने खुद से अपना फैसला लिया होगा। इसकी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। मगर अब सुनने में आया है कि वह अलग से लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। इस दौरान सीएम ने नायब सिंह सैनी की पुरानी यादों को साझा करते हुए बताया कि वह उनके बहुत पुराने साथी हैं। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने 1994 में पार्टी के संगठन काम संभाला तो डेढ़ साल बाद जब पीएम मोदी हमारे प्रदेश के प्रभारी बने तो उसी समय कार्यालय में काम करने के नाते नायब सिंह सैनी मेरे पास आए थे।
उनके साथ मिलकर कंप्यूटर व टाइपिंग व ऑफिस के कार्य किए। इस दौरान उनका काफी विकास हुआ। 2014 में चुनाव के दौरान पार्टी ने उन्हें सफल कार्यकर्ता के तौर पर टिकट दिया और चुनाव जीत कर आए।
मनोहर लाल को बदलने चार कारण
- साढ़े नौ साल की सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर थी, इसे काटने के लिए नेतृत्व को बदला गया
- राज्य में अफसरशाही हावी थी। मंत्री नाराज थे, मगर मनोहर लाल लगाम कसने में नाकाम रहे।
- राज्य में पिछड़े वर्ग को साधने के लिए मनोहर लाल की जगह सैनी को लाया गया
- एमपी, राजस्थान की तरह पार्टी राज्य को नया नेतृत्व देना चाहती थी, इसलिए मनोहर को बदला गया