चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय सीनेट चुनाव में अब तक जीते 32 सदस्यों के लिए जोड़-तोड़ शुरू हो गई है। भाजपा व कांग्रेस के दिग्गज इनको अपने पाले में लेने के लिए बैठकें कर रहे हैं। सवाल इज्जत का है, क्योंकि सीनेट में कांग्रेस का दबदबा रहा है। आगे भी दिग्गज इस दबदबे को कायम करना चाहते हैं। वहीं भाजपा मनोनीत सदस्यों के बलबूते सीनेट में अपना दबदबा होने की ताल ठोक रही है।
सीनेट में सदस्यों की संख्या 92 है। इन सीटों के सापेक्ष अब तक 32 सदस्य चुने जा चुके हैं। इसमें कुछ पहले से ही कांग्रेस व भाजपा के हैं। कुछ सदस्य निर्दलीय हैं। ये सदस्य संकाय वर्ग, कॉलेज प्रमुख वर्ग, प्रोफेशनल व तकनीकी कॉलेज वर्ग, कॉलेज शिक्षक वर्ग आदि के जरिए चुनकर आए हैं। इन सदस्यों के नाम चांसलर कार्यालय जाएंगे और वहां से इनके कार्यकाल में शुभारंभ की तिथि तय होगी। हालांकि सभी वर्गों के चुनाव निपटने के बाद एक साथ ही सभी सदस्यों का कार्यकाल शुरू होगा। सूत्रों का कहना है कि चुने गए प्रत्याशियों के भाव बढ़ गए हैं। वे भाजपा व कांग्रेस के सदस्यों को कम भाव दे रहे हैं। इसके लिए सदस्यों पर नेताओं से भी दबाव बनवाया जा रहा है।
कांग्रेस के हाथ लगी हैं चुनी गई सीटें
सूत्रों का कहना है कि चुने गए 32 सदस्यों में से सर्वाधिक संख्या कांग्रेस के सदस्यों की बताई जा रही है। भाजपा खेमे को कम सीटें मिली हैं। यदि यह गणित ठीक रहा तो भाजपा के लिए संकट खड़ा होगा। हालांकि भाजपा पूरी तरह से मनोनीत सदस्यों की सूची पर निर्भर है जो चांसलर कार्यालय की ओर से घोषित की जाएगी। मनोनीत सदस्यों की संख्या 35 होगी। इन सदस्यों में तीन से चार पद पदेन होंगे जो मंत्री व न्यायाधीशों के होंगे। बाकी 31 सदस्य किसी भी वर्ग के हो सकते हैं। भाजपा जोर लगा रही है कि 31 सदस्य मनोनीत सूची में उन्हीं के हों। यदि ऐसा हुआ तो फिर सीनेट में नजारा बदल सकता है।
जिस दल के पास 42 सदस्य, उनका हो सकता है दबदबा
स्नातक वर्ग के चुनाव पर सभी की उम्मीदें टिकी हैं। इस वर्ग के जरिए 15 सदस्य चुनकर आएंगे। अब तक कांग्रेस के सदस्य अधिकांश इस वर्ग से जीतते आ रहे हैं, लेकिन इस बार का कुछ पता नहीं। दोनों ही दलों के दिग्गज चाहते हैं कि अधिक से अधिक सीटें उनकी निकलें। इसके लिए जोर लगाया जा रहा है। इस वर्ग का चुनाव 26 सितंबर के बाद हो सकता है। सूत्रों का कहना है कि जिस भी दल के पास 42 से 43 सदस्य होंगे, उसी का दबदबा सीनेट में होगा। हालांकि यह आंकड़ा बाद में घट-बढ़ सकता है। जानकारों का कहना है कि सीनेट में लगभग 80 लोग ही सक्रिय होते हैं। पदेन अधिकारी आदि इसमें नहीं पहुंच पाते। ऐसे में आधा आंकड़ा 40 का होता है। इससे एक या दो सदस्य जिसके पास अधिक होंगे, वे अपना प्रभाव जमा सकते हैं।