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मोदी की शपथ के बाद यहां होंगे बड़े राजनीतिक बदलाव

Sun, 25 May 2014 09:31 AM IST
अनिल भारद्वाज/अमर उजाला, चंडीगढ़
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प्रधानमंत्री पद पर नरेंद्र मोदी की 26 मई को ताजपोशी के बाद पंजाब में भी बड़े राजनीतिक और ब्यूरोक्रेटिक फेरबदल की तैयारी है। प्रदेश मंत्रिमंडल में जहां बदलाव की रूपरेखा तैयार हो रही है, वहीं बड़े स्तर पर प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों के तबादलों का दौर भी शुरू होने के संकेत हैं।
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यह सब लोकसभा चुनाव के नतीजों के मद्देनजर हो रहा है। प्रदेश में लोकसभा चुनाव के लिए लंबे चले प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल व उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल से लेकर भाजपा के कद्दावर नेता अरुण जेटली तक को जो फीडबैक फील्ड से मिली, उससे ही इस बदलाव की जमीन तैयार हुई है।
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राजनेताओं के कामों से खुश नहीं हैं लोग

प्रचार के दौरान लोगों से फीडबैक मिली कि वह अफसरशाही के रवैये और राजनेताओं की कारगुजारी से संतुष्ट नहीं हैं। यही कारण था कि मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने गत 30 अप्रैल को मतदान समाप्त होने के बाद चंडीगढ़ पहुंचने पर अधिकारियों के साथ पहली ही बैठक में कड़े निर्देश जारी करते हुए कहा कि वह आम लोगों व उनके प्रतिनिधियों की समस्याओं पर विशेष ध्यान दें।

संकेत स्पष्ट था कि मुख्यमंत्री बादल ने भांप लिया कि लोग सरकार से संतुष्ट नहीं हैं। रही-सही कसर चुनाव नतीजों ने पूरी कर दी। अकाली-भाजपा गठबंधन 13 में से 7 लोकसभा सीटों पर हारा, जबकि 117 विधानसभा क्षेत्रों में से इसके उम्मीदवारों को केवल 45 सीटों पर ही बढ़त मिल पाई। आम आदमी पार्टी 4, तो कांग्रेस 3 सीटें जीतने में सफल रही।

चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन ने किया सोचने पर मजबूर

गठबंधन के सरकते वोट बैंक और विधानसभा सीटों पर कम होती बढ़त ने अकाली-भाजपा नेताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि स्थिति में सुधार कैसे किया जाए? ऐसे में सबसे पहला कदम व्यापक फेरबदल के रूप में सामने आएगा।

गत 16 मई को चुनाव नतीजे आने के बाद से ही मुख्यमंत्री बादल व उप मुख्यमंत्री सुखबीर दिल्ली में डेरा डाले बैठे हैं। इस दौरान एक दिन कोर कमेटी बैठक के लिए जरूर चंडीगढ़ आए थे।

इस बैठक में भी पार्टी के प्रदर्शन की समीक्षा के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया। एक ओर यह कमेटी अपनी समीक्षा रिपोर्ट तैयार कर रही है, वहीं बादल दिल्ली में अपने नजदीकियों व भाजपा नेताओं के साथ हालात में सुधार के लिए मंत्रणा में मसरूफ हैं।

भविष्य के बदलाव का खाका तैयार कर रहे बादल

हालांकि, केंद्र सरकार में शिअद के लिए मंत्री पदों पर बादल का अधिक ध्यान है, लेकिन वह भविष्य के बदलाव का खाका भी तैयार कर रहे हैं। दूसरी ओर, भाजपा नेतृत्व भी नतीजों से खुश नहीं है और पार्टी के प्रदेश प्रभारी शांता कुमार निराशाजनक प्रदर्शन के लिए सरकार की कारगुजारी व कुछ मंत्रियों की छवि को जिम्मेदार ठहरा चुके हैं।

प्रदेशाध्यक्ष कमल शर्मा भी कह चुके हैं कि सरकार की कार्यशैली में परिवर्तन समय की जरूरत है। उन्होंने चुनाव नतीजों की घोषणा होते ही अरुण जेटली की हार की जिम्मेदारी लेते हुए कहा था कि लोगों के मूड को ध्यान में रखते हुए गठबंधन सरकार को बड़े फैसले लेने होंगे।

अब मोदी सरकार के शपथ ग्रहण के अगले दिन 27 मई को ही पंजाब भाजपा कोर ग्रुप की बैठक दिल्ली में है। अत: केंद्र सरकार के गठन के साथ ही पंजाब की सत्ता में बड़े फेरबदल की आहट अभी से सुनाई दे रही है।
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इनके हो चुके इस्तीफे, बाकियों का इंतजार

लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद भाजपा के मंत्री अनिल जोशी व अकाली मंत्री सरबण सिंह फिल्लौर इस्तीफा दे चुके हैं। जोशी ने जेटली की हार की जिम्मेदारी लेते हुए, तो फिल्लौर ने अपने बेटे का नाम ड्रग तस्करी मामले में उछलने की वजह से इस्तीफे दिए हैं।

इससे पहले तोता सिंह व जागीर कौर के इस्तीफों की वजह से दो अन्य मंत्री पद खाली पड़े हैं। बदले हालात में कुछ और इस्तीफे होना तय है। ऐसे में कई नए चेहरे मंत्रियों व मुख्य संसदीय सचिवों के रूप में देखने को मिलेंगे, इसकी पूरी संभावना है।
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