चंडीगढ़ के 72 साल के एडवोकेट मदन मोहन वत्स ने विश्व की सबसे लंबी श्रीमद्भागवत गीता लिखने का दावा किया है। वह पानीपत के रहने वाले हैं। हालांकि अभी वह जीरकपुर में रहते हैं। उन्होंने 1365 मीटर लंबी गीता लिखने में 905 घंटे का समय लगाया।
वत्स ने ई 126 टी 90 वीएचएस 15 एमएम चौड़ी 510 ग्राम रिबन पर एक्रेलिक पेंट से गीता लिखी है। उन्होंने कहा कि यह नया इतिहास रचा है। उन्होंने कहा कि लिखे जाने के बाद रिबन की लंबाई और लिखने में लगा समय मापना संभव नहीं था। इसलिए उन्होंने एक एक श्लोक लिखने के बाद उसकी लंबाई और लिखने में समय नोट किया। इस काम के लिए उन्होंने 10 वीएच कैसेट का प्रयोग किया। वत्स ने कहा कि उन्होंने करोड़ों साल का एक कैलेंडर भी बनाया है।
विचारकों के संक्षिप्त विचार भी लिखे हैं
18 अध्यायों के 700 श्लोकों व अन्य सामग्री को संस्कृत व हर श्लोक के बाद गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी के पद्यनुवाद को अंकित किया है। इसमें उन्होंने 20 विख्यात विचारकों जैसे महात्मा गांधी, पंडित मदन मोहन मालवीय, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक आदि के संक्षिप्त विचार भी लिखे हैं।
गीता को पहले 10 कैसेटों पर लिखा गया फिर उन्हें हाथ से ही सीधा किया गया। यह रिबन एक कैसेट से दूसरी कैसेट पर जाने के लिए एक विशेष ईवल पट्टी से गुजरता है। जहां इस पर लिखी सामग्री पढ़ी जा सकती है। 12 वोल्ट की दो मोटरों और एक बैटरी द्वारा संचालित यह दो कैसेट (दो स्टैंड पर खड़ी) अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी गति से चलाई जा सकती है।
वत्स को गीता को अलग अलग रूप में प्रस्तुत करने का अनोखा शौक है। एक अन्य कृति में उन्होंने सभी श्लोक कृत्रिम पीपल के पत्तों पर लाकर एक कृत्रिम वृक्ष बनाया। ये कृतियां गीता ज्ञान संस्थानम कुरुक्षेत्र के म्यूजियम में देखी जा सकती है। उन्होंने बताया कि जल्द ही वे गीता जी की सभी श्लोकों को पीपल वृक्ष के असली पतों पर लिखने जा रहे हैं।