जाट कहते हैं कि सैनी प्रत्याशी को वोट नहीं देंगे और सैनी कहते हैं कि जाट प्रत्याशी का वे भी समर्थन करने वाले नहीं हैं। ऐसे में कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट पर सैनी प्रत्याशी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। चूंकि, जाट इस संसदीय क्षेत्र में तीन लाख से ज्यादा हैं। जबकि सैनी मतदाता एक लाख से कम हैं। सैनी उम्मीदवार की नैया उसी सूरत में पार लग सकती है अगर नॉन जाट समुदाय उसके साथ आ जाए।
वहीं, दूसरे दलों के प्रत्याशी भी अगर नॉन जाट हुए तो सैनी प्रत्याशी को जीत का स्वाद चखने के लिए पूरी ताकत झोंकनी पड़ेगी। साथ ही जातीय समीकरण भी फिट बिठाने होंगे। कुरुक्षेत्र निवासी राम सिंह कहते हैं कि जाट आंदोलन ने समाज का भाईचारा ही खत्म कर दिया। विजय सिंह के मन में भी जाट आंदोलन की नाराजगी कायम है।
वह इसके लिए जाट और सैनी समुदाय को खासकर दोष देते हैं। माई चंद सैनी ने बताया कि उनकी आज भी पुराने दोस्तों से अच्छी अंडरस्टैंडिंग हैं, मगर समाज के सभी वर्गों में अब पहले जैसी बात नहीं रही। कुछ समुदाय एक-दूसरे को नफरत की नजर से देखते हैं जो अच्छी बात नहीं है।