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समझौता ब्लास्ट: विशेष एनआईए कोर्ट के जज बोले, साक्ष्य के अभाव में आरोपियों को नहीं मिली सजा

Fri, 29 Mar 2019 06:20 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंचकूला (हरियाणा)
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समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट - फोटो : File Photo
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विशेष एनआईए अदालत के न्यायाधीश जगदीप सिंह ने अपने फैसले में कहा, ‘मुझे गहरे दर्द और पीड़ा के साथ फैसले का सामना करना पड़ रहा है। क्योंकि विश्वसनीय और स्वीकार्य साक्ष्यों के अभाव की वजह से हिंसा के इस नृशंस कृत्य में किसी को गुनहगार नहीं ठहराया जा सका। अभियोजन के साक्ष्यों में निरंतरता का अभाव था और आतंकवाद का मामला अनसुलझा रह गया।’ 

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भारत और पाकिस्तान के बीच चलने वाली समझौता एक्सप्रेस में 18 फरवरी, 2007 को हरियाणा के पानीपत के पास धमाका हुआ। उस वक्त रेलगाड़ी अटारी जा रही थी, जो भारत की तरफ का आखिरी स्टेशन है। इसमें 68 लोगों की मौत हो गई थी। न्यायाधीश ने कहा कि आतंकवाद का कोई मजहब नहीं होता, क्योंकि दुनिया में कोई भी मजहब हिंसा का संदेश नहीं देता। 

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उन्होंने 28 मार्च को सार्वजनिक किए गए विस्तृत फैसले में न्यायाधीश ने कहा है, ‘अदालत को लोकप्रिय या प्रभावी सार्वजनिक धारणा अथवा राजनीतिक भाषणों के तहत आगे नहीं बढ़ना चाहिए और अंतत: उसे मौजूदा साक्ष्यों को तवज्जो देते हुए प्रासंगिक वैधानिक प्रावधानों और इसके साथ तय कानूनों के आधार पर अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना चाहिए।

चूंकि अदालती फैसले कानून के मुताबिक स्वीकार्य साक्ष्यों पर आधारित होते हैं, इसलिए ऐसे में यह दर्द और बढ़ जाता है, जब नृशंस अपराध के साजिशकर्ताओं की पहचान नहीं होती और वे सजा नहीं पाते। संदेह चाहे कितना भी गहरा हो, साक्ष्य की जगह नहीं ले सकता।’

मामले में चारों आरोपियों को बरी करते हुए एनआईए कोर्ट के विशेष जज जगदीप सिंह ने टिप्प्णी करते हुए कहा कि विश्वसनीय और स्वीकार्य सबूत अभियोजन पक्ष की ओर से पेश नहीं किए जा सके हैं। इस कारण आरोपियों को बरी किया जा रहा है। समझौता ब्लास्ट जैसा आतंकवाद का कृत्य अनसुलझा रह गया है, इतना घृणित कार्य करने वाले आरोपी बच गए हैं। यह बहुत दुखद है। 

ट्रेन में धमाका करने वाले जघन्य अपराध के अपराधी अज्ञात और अप्रभावित रहते हैं तो दर्द और अधिक बढ़ जाता है। आपराधिक मामलों में सजा नैतिकता के आधार पर नहीं हो सकती है। अभियोजन पक्ष की ओर से जो सबूत रखे गए हैं वे पर्याप्त नहीं हैं। अपराधियों को सजा नैतिकता के आधार पर नहीं हो सकती है। इसके लिए विश्वसनीय सबूत होने चाहिए। 
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