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Chandigarh News: किसानों काे घटिया खाद सप्लाई करने वाली दो कंपनियों के लाइसेंस रद्द, ब्लैकलिस्ट किया

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-16 जिलों में लिए 40 सैंपल में से 60 प्रतिशत हुए फेल
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-मोहाली, खरड़ और आसपास फेल हुए सर्वाधिक सैंपल
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब में किसानों को घटिया खाद्य सप्लाई करने वाली दो कंपनियों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं। साथ ही इन कंपनियों को सरकार ने ब्लैकलिस्ट घोषित कर दिया है। खाद सप्लाई करने वाली जिन दो कंपनियों के लाइसेंस रद्द किए गए हैं, उनमें मैसर्स कृष्णा फोसकैम और मध्य भारत एग्रो प्रोडक्ट्स लिमिटेड शामिल हैं। खेतीबाड़ी विभाग ने प्रदेश के 16 जिलों में डाई अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) खाद के 40 सैंपल जांच के लिए लैब में टेस्टिंग के लिए भेजे थे। विभाग के मुताबिक इन 40 में से 24 सैंपल (लगभग 60 प्रतिशत) फेल पाए गए। 10 जून को मोहाली, खरड़ और यहां के आसपास के एरिया में खाद के सात सैंपल लिए गए थे, उस समय सभी सैंपल फेल पाए गए थे। यह मामला सामने आने के बाद खेतीबाड़ी मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने जांच के आदेश दिए थे।

खुड्डियां ने बताया कि इन कंपनियों की ओर से मार्कफेड को सप्लाई किए गए डीएपी स्टाॅक में से 40 नमूने लिए गए थे। उन्होंने बताया कि खाद्य कंट्रोल ऑर्डर 1985 के अनुसार इनमें से 24 नमूने गैर-मानक के पाए गए और दो नमूनों की रिपोर्ट अभी आना बाकी है। आगे की कार्रवाई के लिए भारत सरकार के कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय को भी सूचित कर दिया गया है। कृषि विभाग ने राज्य भर में क्वालिटी कंट्रोल अभियान चलाया है और वित्त वर्ष 2024-25 दौरान 4700 खाद के नमूनों की जांच का लक्ष्य निश्चित किया गया है।
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1004 सैंपल और सैंपल जांच के लिए भेजे
कृषि और किसान कल्याण विभाग के डायरेक्टर जसवंत सिंह ने बताया कि क्वालिटी कंट्रोल अभियान के अंतर्गत अब तक खाद के 1004 सैंपल लेकर जांच के लिए अलग-अलग लैब में भेजे गए हैं। कृषि मंत्री ने विभाग के डायरेक्टर को खेती सामग्री की सप्लाई की समीक्षा करने के लिए कहा, ताकि किसानों को मानक उत्पादों की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। डायरेक्टर, कृषि ने आगे बताया कि निश्चित किए गए लक्ष्यों अनुसार जिलों में खाद के नमूने लेने के साथ डीएपी (18:46) एवं अन्य खाद की आमद पर भी लगातार नजर रखी जा रही है।

सप्लाई रोकी, 66 हजार से ज्यादा बोरियां जब्त
दोनों कंपनियों को 11 जून को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। दो बार नोटिस भेजे जाने के बावजूद जब कंपनियों ने उचित जवाब नहीं दिया और बाकी 16 जिलों में लिए सैंपल भी फेल होने का मामला सामने आया, तो खेतीबाड़ी मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने दोनों के लाइसेंस रद्द कर दिए। कृषि विभाग के निदेशक ने तत्काल प्रभाव से पूरे प्रदेश में जिन भी सहकारी समितियों के जरिये यह खाद किसानों तक पहुंचाई जाती थी, वहां इसकी सप्लाई पर रोक लगाने के आदेश जारी कर दिए हैं। प्रदेश के हर जिले में इन दोनों कंपनियों की ओर से सहकारी समितियों को सप्लाई की गई खाद की 66,349 बोरियां जब्त की गई हैं।
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धान की बुआई पर पड़ेगा असर
धान की बुआई के समय खाद के सैंपल फेल होने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। प्रदेश के लगभग हर जिले में धान की बुआई चल रही है। शुरुआती चरण में किसानों को 1.15 लाख मीट्रिक टन डीएपी की जरूरत पड़ेगी, जबकि 31 जुलाई तक यह जरूरत बढ़कर 16 लाख मीट्रिक टन तक जाएगी। हालांकि, कृषि विभाग ने कहा है कि अन्य कंपनियों से जरूरत को पूरा किया जा रहा है। किसानों को परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
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