पद्म भूषण पुरस्कार प्राप्त करतीं गुरमीत बावा की बेटी गिलोरी बावा।
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सुरों की मलिका गुरमीत बावा को मरणोपरांत पद्म भूषण से नवाजा गया है। उनकी बेटी गिलोरी बावा ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से पंजाब की लोक विरासत को संभालने वाली सुरों की मलिका का यह अवार्ड हासिल किया। गिलोरी बावा ने कहा मुझे अपनी मां पर गर्व है, जिनका 45 सेकेंड तक हेक लगाने का रिकॉर्ड आज तक कोई तोड़ नहीं पाया। बता दें कि सुरों की मलिका ने 21 नवंबर 2021 को दुनिया को अलविदा कह दिया था।
पंजाबी लोक गायकी को एक नई दिशा औ जीवंत करने वालीं गुरमीत बावा का जन्म गुरदासपुर के गांव कोठे में 1944 में हुआ था। तब लड़कियों को पढ़ने की इजाजत नहीं होती थी। उन्होंने अपनी शादी के बाद पढ़ाई पूरी की। पहले वह जेबीटी कर एक शिक्षका बनीं, ताकि समाज में महिलाओं को रोशनी की राह दिखा सकें लेकिन अपने संगीत के प्रति प्रेम को कभी अपने से अलग नहीं कर पाईं।
उनके पति किरपाल बावा ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और इसमें उनका भरपूर सहयोग किया और हमेशा प्रोत्साहित किया। सुरों की मलिका को एक अलग पहचान बनाने के लिए मुंबई तक लेकर गए। फिल्म उद्योग में उनकी पहचान सुरों की मलिका के रूप में हुई। उन्होंने हिंदी और पंजाबी फिल्मों में अपने अंदाज में पंजाबी बोलियां लोगों तक पहुंचाईं, जो अक्सर शादी समागम में सुनने को मिलती हैं।
गुरमीत बावा ने पंजाबी लोक गायकी के जरिये पंजाब की परंपराओं को जीवंत किया और बिना सांस लिए 45 सेकेंड तक हेक लगाने का रिकॉर्ड बनाया, जिसे आज तक कोई तोड़ नहीं सका। उनकी दोनों बेटियों लाची बावा और गिलोरी बावा भी पंजाबी लोक गायकी में अपनी मां (गुरु) के पदचिह्नों पर चलते हुए एक अलग पहचान बनाई।
2019 में लाची बावा की मौत के बाद सुरों की मलिका बीमार रहने लगीं और 21 नवंबर 2021 को हमेशा के लिए इस दुनिया को अलविदा कह गईं। बेटी लाची बावा और मां गुरमीत बावा की मौत के बाद अब उनकी दूसरी बेटी गिलोरी बावा पंजाबी लोक कला को संजोने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहीं हैं। वे कहतीं हैं कि उन्हें अपनी मां पर गर्व है।