कोरोना महामारी के बीच पीजीआई में हृदय प्रत्यारोपण से जीवनदान पाने वाले 13 साल के लिए कृष्णा को सोमवार को अस्पताल से छुट्टी मिल गई। छुट्टी के समय पीजीआई की टीम कृष्णा को नया जीवन मिलने पर बधाई दे रही थी। वहीं, उस फरिश्ते को भी याद कर रही थी, जिसके दिल की बदौलत यह संभव हो सका।
पीजीआई से घर जाते वक्त कृष्णा ने डॉक्टरों की टीम को धन्यवाद कहा। वहीं, उसके माता-पिता ने डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को धन्यवाद देते कहा कि धरती पर वे उनके लिए भगवान साबित हुए हैं। उन्होंने उस परिवार को धन्यवाद देते कहा कि उनके बेटे का जीवन उनके दान की बदौलत मिला है।
सेक्टर-30 निवासी कृष्णा एसडी पब्लिक स्कूल में 8वीं का छात्र है। हार्ट प्रॉब्लम की वजह से वह काफी समय से बीमार चल रहा था। कोविड-19 के दौर में जब उसकी हालत बिगड़ी तो परिजनों ने पीजीआई में भर्ती कराया। इसके बाद 31 जुलाई को दान में मिले हृदय को कृष्णा में प्रत्यारोपित किया गया।
कोविड की चुनौती के बीच सफलता
कोविड के बीच पीजीआई के डॉक्टरों की टीम ने कृष्णा का सफल ऑपरेशन कर जीवनदान दिया। अब कृष्णा पूरी तरह से स्वस्थ है। डिस्चार्ज होते समय पीजीआई डायरेक्टर प्रो. जगतराम ने कृष्णा को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस समय मरीज में हार्ट ट्रांसप्लांट करना मेडिकल साइंस के लिए एक बड़ी चुनौती है। पीजीआई के डॉक्टरों ने उस चुनौती को सफलतापूर्वक पूरा किया है।
ट्रांसप्लांट के बाद कोरोना पॉजिटिव हुआ
प्रो. जगतराम ने बताया कि जिस समय कृष्णा को पीजीआई में भर्ती किया गया था, वह कोरोना पॉजिटिव नहीं था, लेकिन हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। इस दौरान कोविड-19 हॉस्पिटल में डॉक्टरों और पैरामेडिकल टीम ने पूरा ध्यान रखा और इलाज के बाद रिपोर्ट निगेटिव आ गई। प्रत्यारोपण के एक महीने बाद उसे अस्पताल से छुट्टी मिली है।
कोविड-19 हॉस्पिटल के इंचार्ज प्रो. विपिन कौशल ने कॉर्डियोलॉजी, सीटीवीएस, एनेस्थीसिया और आईसीयू की टीम को धन्यवाद दिया और उनके जज्बे को सलाम किया। कृष्णा की मां मधु ने कहा कि वे अपने बेटे को जीवनदान देने वाली पीजीआई की टीम के लिए पूरी उम्र शुक्रगुजार रहेंगी। वहीं, कृष्ण के पिता भूपिंदर ने अंगदान करने वाले परिवार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे लोगों की ही वजह से जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे लोगों को जीवनदान मिल रहा है।