किसान और मजदूर जैसे आम लोग आपके काले तीन कृषि कानूनों से ठगे हुए महसूस कर रहे हैं। आम आदमी का जीवन खराब और व्यर्थ हो रहा है। जनता वोटों के लिए नहीं बल्कि अपने परिवारों और पीढ़ियों की आजीविका के लिए पटरियों और सड़कों पर है। कुछ पूंजीपतियों को खिलाने के लिए आपने आम लोगों और कृषि को नष्ट कर दिया है, जो भारत की रीढ़ है।
पत्र में आगे लिखा है कि कुछ पूंजीपतियों के लिए किसानों, मजदूरों और आम लोगों की रोजी और रोटी को मत छीनिए। यह स्थिति उन्हें सल्फास खाने के लिए मजबूर कर रही है। सामाजिक रूप से आपने जनता को धोखा दिया है। राजनीतिक रूप से आपने अपने सहयोगी शिरोमणि अकाली दल को धोखा दिया है। सुनो, लोगों की आवाज ईश्वर की आवाज है। मैं आपके बहरे और गूंगेपन को होश में लाने के लिए इस विश्वव्यापी आंदोलन के समर्थन में अपना बलिदान देता हूं। पत्र के अंत में पेन से लिखा है कि न्यायालय भी आम जन में अपनी विश्वसनीयता खो चुका है।
नयागांव चौक के पास जहरीला पदार्थ निगलने के कारण आंदोलनकारी की मौत हो गई। पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है। मृतक के पास जो पत्र मिला है, उसकी जांच की जाएगी। - अशोक कुमार, डीएसपी