अखिल भारतीय जाट महासभा ने कहा है कि आरक्षण की मांग पूरी नहीं होने के कारण जाट तंग हैं इसलिए ही जंग है। महासभा का कहना है कि जाटों को जब तक आरक्षण नहीं मिल जाता तब तक आंदोलन जारी रहेगा। हालांकि महासभा ने वैंकेया नायडू कमेटी की कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार करने की बात भी कही।
चंडीगढ़ प्रैस क्लब में शनिवार को एक प्रैस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए महासभा के महासचिव युद्धवीर सिंह ने कहा कि हाल के जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के लिए उन्हें दुख है लेकिन यह हिंसा जाटों ने नहीं की बल्कि भीड़ में शामिल बैड एलीमेंट ने मौके का फायदा उठाया। यह पूछे जाने पर कि सड़क-रेल यातायात रोकना कहां तक सही था, युद्धवीर ने कहा कि पहले भी देश में आंदोलनों के दौरान सड़क-रेल मार्ग जाम किए जाते रहे हैं। यह साधारण बात है।
उन्होंने लोगों को हुई असुविधा के लिए खेद भी जताया। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते जाटों की मांग को सुन लिया जाता तो यह नौबत नहीं आती। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन तो शांतिपूर्ण था लेकिन भाजपा सांसद राजकुमार सैनी ने जहर उगला जिससे नौजवानों का धैर्य जवाब दे गया।
युद्धवीर सिंह ने कहा कि जाट समुदाय किसी भी जाति के विरुद्ध नहीं है और उसका किसी से व्यक्तिगत द्वेष नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि रोहतक में डीएसपी भाटिया ने होस्टल में घुसकर जाट युवकों को बुरी तरह पीटा, जिससे गुस्सा भड़क गया। उन्होंने इस बात से इंकार किया कि रोहतक में जाटों ने आगजनी व लूटपाट की। उन्होंने कहा कि पुलिस ने रोहतक में अब तक 71 लोग पकड़े हैं, जिनमें से 59 गैर जाट हैं। अन्य शहरों में भी यही हाल है। युद्धवीर ने कहा कि हाल के आंदोलन में जाटों ने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया बल्कि पुलिस की गोली से जाट युवक ही मारे गए हैं।
मुरथल मामले पर सदमे में था जाट समुदाय
युद्धवीर सिंह ने कहा कि मुरथल मामले पर जाटों को बदनाम करने की साजिश रची गई। उन्होंने कहा कि मीडिया में यह खबर आते ही पांच दिन तक पूरी जाट बिरादरी खौफजदा रही। पूरी बिरादरी पर कलंक लग जाता अगर यह घटना सच साबित होती। उन्होंने कहा कि मुरथल मामले में कोई सबूत नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि जाट आगजनी, लूटपाट, दुराचार में विश्वास नहीं रखते। उन्होंने बैंक लूट और मंत्री का घर जलाए जाने की घटना में जाटों का हाथ होने से भी इंकार किया। उन्होंने कहा? कि ऐसी खबरों से जाट बिरादरी आहत है और सरकार से हम मांग करते हैं कि पूरे मामले की न्यायिक जांच कराई जाए। युद्धवीर ने कहा कि जांच में अगर कोई जाट युवक दोषी पाए गए तो उसे भी बख्शा नहीं जाना चाहिए।
इसलिए कर रहे हैं आरक्षण की मांग
युद्धवीर सिंह ने जाटों को आरक्षण दिए जाने की मांग को सही ठहराते हुए कहा कि 1990 में मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू होने के समय से ही जाट खुद को ओबीसी में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंडल आयोग की रिपोर्ट में भी जाटों को पिछड़ा माना गया था लेकिन रिपोर्ट के 11वें चैप्टर में कहा गया कि जाट खुद को पिछड़ा नहीं मानते इसलिए उन्हें पिछड़ा वर्ग में शामिल न किया जाए। उन्होंने कहा कि जब आयोग द्वारा तय मानदंड के अनुसार जाट आरक्षण के हकदार हैं तो उन्हें केवल न मानने के आधार पर आरक्षण से वंचित करना गलत है। उन्होंने आगे कहा कि 1998 में दारा सिंह के नेतृत्व में जाट आंदोलन ने जोर पकड़ा और उसके बाद हरियाणा में गुरनाम कमीशन, वर्मा कमीशन व गुप्ता कमीशन बने, जिन्होंने जाटों को पिछड़ा माना। लेकिन राजनीतिक साजिश के तहत जाटों को आज तक उनका हक नहीं दिया जा रहा।