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Punjab News: जागीर कौर को महंगा पड़ा बादलों का विरोध, आखिर शिअद ने क्यों उठाया जोखिम भरा कदम?

Tue, 08 Nov 2022 10:06 AM IST
ajay kumar हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पार्टी के एक सीनियर नेता के अनुसार, बादल परिवार अपने फैसले को लेकर इसलिए भी निश्चिंत है क्योंकि एसजीपीसी चुनाव में 156 सदस्यों में से केवल 32 ही बीबी जागौर कौर के साथ हैं, जिसके चलते वह शिअद प्रत्याशी की जीत तय मानी जा रही है।
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बीबी जागीर कौर। - फोटो : फाइल
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विस्तार
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वरिष्ठ अकाली नेता बीबी जागीर कौर को पार्टी से निकाले जाने के फैसले के साथ ही शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और बीबी जागीर कौर को होने वाले नफे-नुकसान पर चर्चा शुरू हो गई है। जागीर कौर दोआबा क्षेत्र में शिअद का प्रमुख चेहरा रही हैं और उन्हें पार्टी से अलग किए जाने के फैसले को ‘जोखिम भरे फैसले’ के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, जागीर कौर अगर एसजीपीसी चुनाव नहीं जीत सकीं तो उनके पास संयुक्त अकाली दल के रूप में एक विकल्प बचेगा।

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जागीर कौर की एसजीपीसी के प्रधान पद का चुनाव लड़ने की जिद को पहले तो पार्टी ने हलके में लिया लेकिन पार्टी अध्यक्ष सुखबीर बादल के आग्रह करने पर भी जब जागीर कौर नहीं मानीं तो पार्टी प्रधान खासतौर पर बादल परिवार के लिए यह प्रतिष्ठा का सवाल बन गया। इस मामले को लेकर सुखबीर बादल की अध्यक्षता में पार्टी के सीनियर नेताओं की एक बैठक भी हुई। इसमें तय किया गया कि पूरे मामले पर चार नवंबर तक इंतजार होगा और इसके बाद एसजीपीसी चुनाव से पहले फैसला ले लिया जाएगा। दरअसल, बादलों ने उसी समय बीबी जागीर कौर को पार्टी से निकाले जाने का फैसला ले लिया था। सारी औपचारिकताएं सोमवार को पूरी कर ली गईं।

पार्टी के एक सीनियर नेता के अनुसार, बादल परिवार अपने फैसले को लेकर इसलिए भी निश्चिंत है क्योंकि एसजीपीसी चुनाव में 156 सदस्यों में से केवल 32 ही बीबी जागौर कौर के साथ हैं, जिसके चलते वह शिअद प्रत्याशी की जीत तय मानी जा रही है। फिर भी अगर जागीर कौर एसजीपीसी प्रधान पद का चुनाव जीत जाती हैं तो यह बादलों के लिए बहुत बड़ा झटका साबित होगा और शिअद में बड़ी टूट-फूट को जन्म देगा। 
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इसी को ध्यान में रखते हुए, शिअद ने सियासी स्तर पर बीबी जागीर कौर को घेरने की योजना पर भी काम शुरू कर दिया है। निष्कासन के साथ ही पार्टी ने यह प्रचारित किया है कि बीबी को भाजपा और कांग्रेस की शह मिल रही है। भाजपा नेता का स्टिंग ऑपरेशन सार्वजनिक करने का जो समय चुना गया, वह बीबी जागीर कौर की उम्मीदवारी पर सवालिया निशान लगाने वाला है। शिअद द्वारा जागीर कौर की हार-जीत को सियासी दलों की हार-जीत के रूप में पेश किया जाना तय है।

दूसरी ओर, शिअद ने दोआबा क्षेत्र में अपना बड़ा नेता गंवाने का ऐसे समय फैसला लिया है, जब उसके पास कोई अन्य विकल्प नहीं है। पार्टी की कोर कमेटी में भी बीबी जागीर कौर ही एकमात्र तेजतर्रार महिला नेता रहीं हैं और पार्टी के भीतर उनके समर्थकों की संख्या भी कम नहीं है। दोआबा में बीबी महिंद्र कौर जोश पहले ही भाजपा में शामिल हो चुकी हैं, जबकि बीबी उपिंदर कौर भी विधानसभा चुनाव में टिकट न मिलने के बाद पार्टी से दूरी बना चुकी हैं। माना जा रहा है कि एसजीसीपी चुनाव के बाद जागीर संयुक्त अकाली दल से जुड़ सकती हैं। ऐसे संकेत संयुक्त अकाली दल के नेता सुखदेव सिंह ढींढसा से हालिया बयान से भी मिले हैं।

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