फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हीराक्षी की मौत जिम्मेदार कौन...आज तक नहीं पता चला

विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। सेक्टर-9 स्थित कार्मल कॉन्वेंट स्कूल में 250 साल पुराना हेरिटेज पेड़ गिरने से हुए हादसे को सोमवार को पूरे चार महीने हो गए, लेकिन अब तक प्रशासन यह नहीं तय कर पाया है कि किसकी लापरवाही से 16 वर्षीय हीराक्षी को जान गंवानी पड़ी। अब तक सभी को मुआवजा भी मिल चुका है, लेकिन लोगों को आज तक नहीं पता चला कि जिम्मेदार कौन है।
विज्ञापन

बीते 8 जुलाई को हादसे के बाद प्रशासन के कई विभाग सक्रिय हो गए थे। प्रशासन ने उसी दिन मजिस्टीरियल जांच के आदेश दे दिए। पुलिस ने अज्ञात पर केस दर्ज कर लिया, समाज कल्याण विभाग ने चाइल्ड सेफ्टी ऑडिट के आदेश दिए लेकिन समय बीतने के साथ सारे आदेश धुंधले हो चुके हैं। मजिस्टीरियल जांच कुछ ही दिन बाद बंद कर दी गई। पुलिस की जांच भी अधूरी है। चाइल्ड सेफ्टी ऑडिट का भी कुछ अता-पता नहीं है। हादसे के बाद 13 जुलाई को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज जितेंद्र चौहान की अध्यक्षता में एक सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया। उनकी जांच भी अब तक पूरी नहीं हुई है। 25 अगस्त को उन्होंने प्रशासन के विभिन्न अधिकारियों के साथ बैठक की थी। वह कई हेरिटेज पेड़ों को देखने भी गए। इससे पहले स्कूल के स्टाफ से भी मिले, बच्चों से बातचीत की लेकिन आज तक लोगों को ये नहीं पता चल पाया है कि पेड़ किस विभाग की लापरवाही की वजह से गिरा था।
शीला अब तक बयान देने की हालत में नही, इसलिए जांच अधूरी
प्रशासन की तरफ से बताया जा रहा है कि जांच इसलिए पूरी नहीं हो पाई है, क्योंकि हादसे की चश्मदीद स्कूल की अटेंडेंट शीला अभी तक बयान देने की हालत में नहीं है। जस्टिस जितेंद्र चौहान (सेवानिवृत्त) शीला के ठीक होने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि उनसे बात करके वास्तविकता का पता लगाया जा सके। पेड़ गिरने के हादसे में स्कूल की अटेंडेंट शीला बुरी तरह से घायल हुईं थी। वह पूरे एक महीने पीजीआई में भर्ती रही। इस दौरान कई सर्जरी और ऑपरेशन हुए। 8 अगस्त को उन्हें पीजीआई से छुट्टी दी गई। वह किशनगढ़ में रहती थीं, लेकिन बेहतर देखभाल के लिए उन्होंने चंडीगढ़ छोड़ दिया और अपने मायके रोपड़ में रहने लगीं।
विज्ञापन

हीराक्षी के घर जाने के बाद प्रशासक ने मुआवजे का किया था एलान
हादसे के कुछ दिन बाद हीराक्षी के परिजनों से मिलने प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित व अन्य अधिकारी उनके घर पहुंचे थे। हीराक्षी के माता-पिता और दादा के साथ प्रशासक ने काफी देर तक बातचीत की और ढांढस बंधाया। वापस आने के बाद उन्होंने सभी के लिए मुआवजे का एलान किया। फैसला लिया गया कि हीराक्षी के परिवार को 20 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। जो गंभीर रूप से घायल हुए हैं, उन्हें 10 लाख रुपये और जिन्हें कम गंभीर चोटें आई हैं उन्हें एक लाख रुपये प्रशासन की तरफ से दिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें