सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी प्रकाश सिंह
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हरियाणा में एक बार फिर पांच जून से आंदोलन की चेतावनी से निपटने के लिए प्रीवेंटिव एक्शन के अलावा हथियारों को जमा करवाने से हालात को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकेगा।फरवरी में हुए जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान अधिकारियों की भूमिका की जांच के लिए गठित कमेटी के चेयरमैन, यूपी और असम के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह ने अमर उजाला से बातचीत में यह बातें कहीं।
पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह ने कहा कि आंदोलन के दौरान लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई चल रही है। ऐसे हालात से निपटने के लिए जरूरी है कि प्रीवेंटिव एक्शन (निवारक कार्रवाई)लिया जाए। उन्होंने कहा कि डीजीपी केपी सिंह प्रदेश की कानून व्यवस्था पर नजरें बनाए हुए हैं और ऐसी स्थिति पैदा नहीं होगी। पूर्व में हुए आंदोलन के दौरान कहां-कहां चूक हुई और इससे बचाव और पुलिस रिफॉर्म को लेकर भी प्रकाश सिंह अध्ययन करेंगे।
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लूटे गए असलहों के इस्तेमाल का खतरा बरकरार : डीजीपी
चंडीगढ़। जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान थाने और पुलिस चौकी से लूटे गए असलहों की रिकवरी के बारे में डीजीपी केपी सिंह ने कहा कि अधिकतर बरामदगी की जा चुकी है। बचे हुए हथियारों को बरामद करने के लिए लगातार पुलिस कर्मी जुटे हुए हैं। लूटे गए हथियारों से कभी भी उपद्रव में इस्तेमाल किये जाने का खतरा बरकरार है। ऐसे में हरियाणा पुलिस की कोशिश है कि जल्द सभी हथियार बरामद कर लिए जाएं।
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प्लास्टिक की गोलियों से भीड़ को तितर-बितर करने में हैं सक्षम
चंडीगढ़। पुलिस माडर्नाइजेशन के तहत हरियाणा पुलिस के कर्मी अब लेस लीथल वेपन्स (कम घातक हथियार)से लैस होंगे। जरूरत पड़ने पर भीड़ को तितर बितर करने के लिए रबर और प्लास्टिक की गोलियों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है, ताकि कम से कम नुकसान से किसी भी हिंसा या उपद्रव की स्थिति को काबू किया जा सके। शुरुआती दो तीन जिलों में ऐसे हथियारों का इस्तेमाल शुरू किया गया है, जिसे बाद में पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।